बंगाल चुनाव में 231 से 242 सीटें जीतेगी तृणमूल कांग्रेस, ज्योतिप्रिय मल्लिक का दावा

West Bengal Election 2026: राशन घोटाला में एक साल से अधिक समय तक जेल में बिताने वाले ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नेता और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे ज्योतिप्रिय मल्लिक ने दावा किया है कि उनकी पार्टी इस बार चुनाव में 231 से 242 सीटें जीतेंगी. साथ ही उन्होंने भाजपा की सीटें घटने का भी दावा किया है. मलिक ने और क्या-क्या कहा है, यहां पढ़ें.

West Bengal Election 2026: एक वक्त उत्तर 24 परगना में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी माने जाने वाले तृणमूल कांग्रेस के नेता ज्योतिप्रिय मलिक का मानना है कि विधानसभा चुनाव में ‘रिकॉर्ड जीत’ ही उनके खिलाफ हुई ‘साजिश’ का जवाब होगी, जिसके कारण उन्हें राशन वितरण घोटाले में जेल जाना पड़ा.

कार्यकर्ताओं में बालू के नाम से लोकप्रिय हैं टीएमसी नेता

पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच ‘बालू’ के नाम से लोकप्रिय मलिक ने कहा कि जनादेश ही उन लोगों को जवाब देगा, जिन्होंने उन्हें ‘राजनीतिक रूप से खत्म करने की’ कोशिश की. उत्तर 24 परगना जिले की हाबरा सीट 2026 के विधानसभा चुनावों में सबसे चर्चित सीटों में से एक बन गयी है. इसकी वजह मलिक की जेल से वापसी के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरना है. भाजपा ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को प्रमुख चुनावी हथियार बनाया है.

राशन घोटाला में ममता बनर्जी के मंत्री को जाना पड़ा था जेल

मलिक को कथित राशन घोटाले की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के सिलसिले में जेल जाना पड़ा था. हालांकि, मलिक ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया. उनका दावा है कि उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी या मामला दर्ज नहीं था, फिर भी उन्हें महीनों तक हिरासत में रखा गया. उन्होंने कहा कि जमानत मिलने के बाद उन्हें पता चला कि किसी थाने में उनके खिलाफ कोई शिकायत ही नहीं थी.

तृणमूल को कमजोर करने के लिए मुझे जेल भेजा – मलिक

मलिक ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी का समय भी राजनीतिक रूप से अहम था. इसका उद्देश्य 2024 के लोकसभा चुनाव में बनगांव क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करना था. उन्होंने कहा- वे मुझे लोकसभा चुनावों के दौरान दूर रखना चाहते थे, ताकि मैं राजनीतिक रूप से काम न कर सकूं. अगर मैं सक्रिय होता तो बनगांव सीट जीती जा सकती थी.

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एक साल से अधिक जेल में रहे ज्योतिप्रिय मलिक

ईडी ने अक्टूबर 2023 में मनी लाउंडरिंग केस की जांच के तहत उन्हें गिरफ्तार किया था. वह वर्ष 2011 से 2021 के बीच राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री रहे थे. एक वर्ष से अधिक समय जेल में बिताने के बाद जनवरी 2025 में उन्हें 50 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत मिली. इसके बावजूद तृणमूल नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाये रखा और उन्हें हाबरा से फिर उम्मीदवार बनाया, जिसे लेकर भाजपा ने पार्टी पर निशाना साधा.

मलिक के लिए राजनीतिक पकड़ साबित करने का अवसर

मलिक के लिए यह चुनाव केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल नहीं, बल्कि उस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने का अवसर भी है, जहां उन्होंने एक दशक पहले वाम दलों को कमजोर किया था. उन्होंने बताया कि पार्टी ने चुनाव की तैयारी 5-6 महीने पहले ही शुरू कर दी थी और कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं.

बंगाल में सत्ताविरोधी लहर से ज्योतिप्रिय का इनकार

मलिक ने अपनी जीत पर पूरा विश्वास जताया. कहा कि बनगांव उपखंड में तृणमूल को व्यापक समर्थन मिलेगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बार भाजपा की सीट घट जायेंगी. उन्होंने सत्ता विरोधी लहर से भी इनकार करते हुए कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य में व्यापक विकास हुआ है और कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को आर्थिक मजबूती मिली है.

हाबरा सीट पर 80% हिंदू और 20% मुस्लिम मतदाता

हाबरा सीट की सामाजिक संरचना दिलचस्प है. यहां लगभग 80 प्रतिशत मतदाता हिंदू और 20 प्रतिशत मुस्लिम हैं. मतुआ समुदाय यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इससे यह सीट तृणमूल और भाजपा के बीच अहम मुकाबले का केंद्र बन गयी है. मलिक ने पार्टी द्वारा 74 विधायकों के टिकट काटे जाने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह नेतृत्व का अधिकार है.

ज्योतिप्रिय मलिक की भविष्यवाणी – 231 से 242 सीटें जीतेगी टीएमसी

ज्योतिप्रिय मलिक ने भविष्यवाणी की कि तृणमूल कांग्रेस 231 से 242 के बीच सीटें जीतेगी. उन्होंने भविष्य में राजनीति से हटने के संकेत भी दिये, लेकिन फिलहाल TMC की जीत को लेकर आश्वस्त दिखे और 231 से 242 सीटें जीतने का दावा किया. हाबरा का जनादेश यह तय करेगा कि मलिक की वापसी राजनीतिक पुनरोत्थान की कहानी बनेगी या पश्चिम बंगाल की कड़ी चुनावी जंग का एक अध्याय भर रह जायेगी.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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