बंगाल में बूथ के 100 मीटर के दायरे में नो-एंट्री, केवल इन्हें मिलेगा प्रवेश, जानें नये नियम

WB Election 2026: निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं. मतदान केंद्र के 100 मीटर के भीतर केवल मतदाताओं को प्रवेश मिलेगा. फर्जी वोटिंग रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम.

WB Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के लिए निर्वाचन आयोग (ECI) ने कमर कस ली है. 23 अप्रैल को होने वाले 152 निर्वाचन क्षेत्रों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए आयोग ने अब तक का सबसे कड़ा सुरक्षा घेरा तैयार किया है.

प्रतिबंधित क्षेत्र में सिर्फ मतदाता को मिलेगा प्रवेश

मतदान केंद्रों के 100 मीटर के दायरे को पूरी तरह विनियमित (Regulated) कर दिया गया है. इस प्रतिबंधित क्षेत्र में केवल और केवल वास्तविक मतदाताओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी. किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या बाहरी भीड़ के घुसने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गयी है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

WB Election 2026: फर्जी वोटिंग पर ‘ट्रिपल लेयर’ वार

आयोग ने फर्जी मतदान को जड़ से खत्म करने के लिए सत्यापन (Verification) के कई स्तर तैयार किये हैं.

  • 100 मीटर की लक्ष्मण रेखा : मतदान केंद्रों के पास व्यवस्था बनाये रखने के लिए 100 मीटर की परिधि को चिह्नित किया जा रहा है.
  • पहला सत्यापन (Primary Check): बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) और सरकारी कर्मचारी इस 100 मीटर की सीमा के बाहर तैनात रहेंगे. यहां मतदाताओं के पहचान दस्तावेजों की शुरुआती जांच की जायेगी.
  • 2 अतिरिक्त जांच केंद्र : प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर प्रवेश करने के बाद, मतदान केंद्र तक पहुंचने से पहले मतदाता को 2 अलग-अलग स्थानों पर फिर से दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा. यानी 3 स्तर की जांच के बाद ही कोई व्यक्ति ईवीएम तक पहुंच पायेगा.

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बिना वोटर पर्ची वालों के लिए क्या हैं नियम?

आयोग ने मतदाता पर्चियों के वितरण को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किये हैं.

  • घर-घर दस्तक : बीएलओ को निर्देश दिया गया है कि वे अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर मतदाता पर्चियां वितरित करें.
  • पीठासीन अधिकारी का रिकॉर्ड : जिन मतदाताओं से संपर्क नहीं हो पाया है, पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) उनका विस्तृत रिकॉर्ड रखेंगे और संपर्क न हो पाने का कारण भी दर्ज करेंगे.
  • ऑन-द-स्पॉट वेरिफिकेशन : यदि किसी मतदाता को पर्ची नहीं मिली है और वह मतदान केंद्र आता है, तो पीठासीन अधिकारी मतदाता सूची में नाम और फोटो का मिलान कर उसकी पहचान पुख्ता करेंगे और फिर वोट डालने की अनुमति देंगे.

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लापरवाही पर सीधे निलंबन, CEO की कड़ी चेतावनी

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने कानून-व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ शनिवार को ऑनलाइन बैठक की. बैठक में सख्त संदेश दिया गया. कहा गया कि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जायेगी. यदि किसी इलाके में अप्रिय घटना होती है या कानून-व्यवस्था में लापरवाही पायी जाती है, तो संबंधित प्रभारी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया जायेगा.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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