ठंड से राहत दिलाने के लिए सजायी मानवता की दीवार

वैसे तो पुलिस का नाम आते ही आम लोगों के मन में काफी कड़वाहट आ जाती है. या यूं कहें कि किसी न किसी व्यक्ति के मन में न भूलने वाली पुरानी यादें ताजी हो जाती हैं.

लोगों के घरों से पुराने गर्म कपड़े बटोर कर एक दीवार में सजा देते हैं पुलिसकर्मी बापन दास

विकास कुमार गुप्ता, कोलकाता

वैसे तो पुलिस का नाम आते ही आम लोगों के मन में काफी कड़वाहट आ जाती है. या यूं कहें कि किसी न किसी व्यक्ति के मन में न भूलने वाली पुरानी यादें ताजी हो जाती हैं. इन सब के बीच कोलकाता पुलिस के एक पुलिसकर्मी अपने गरीब व जरूरतमंद लोगों के हित में लगातार किये जाने वाले काम को लेकर अन्य पुलिसकर्मियों के लिए एक मिशाल पेश करने के साथ उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनते जा रहे हैं. हम बात कर रहे हैं कोलकाता पुलिस के एक सीनियर पुलिसकर्मी बापन दास की. इन दिनों शहर में लगातार बढ़ रहे कड़ाके की ठंड को देखते हुए बापन ने मानवता की एक अनोखी मिशाल पेश करते हुए गरीब व जरूरत मंद लोगों के लिए मानवता की एक दीवार गर्म कपड़ों से सजाई है. इस दीवार पर हर एक साइज की विभिन्न प्रकार के गर्म कपड़ों के साथ अन्य कपड़ों को भी टांगकर रखा गया है. जिन कपड़ों को बिल्कुल मुफ्त में कोई भी जरूरत मंद व्यक्ति यहां आकर हासिल कर सकता है.

दक्षिणेश्वर मेट्रो स्टेशन के पास रेलवे ब्रिज के नीचे सजायी गयी है मानवता की यह दीवार :

इस दीवार को लेकर कोलकाता पुलिस के कर्मी बापन दास कहते हैं कि उत्तर कोलकाता में मां काली के प्रसिद्ध दर्शनीय धार्मिक स्थल दक्षिणेश्वर मंदिर के पास स्थित दक्षिणेश्वर मेट्रो स्टेशन के पास मौजूद रेलवे ब्रिज के ठीक नीचे यह दीवार पुराने गर्म कपड़ों से सजाई गयी है. इस दीवार में शॉल से लेकर जैकेट, स्वेटर, ऊंनी कुर्ती के साथ अन्य कई प्रकार के गर्म कपड़े मौजूद हैं. कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति, जिनके पास कड़ाके की ठंड में गर्म कपड़े खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं, वे हर गरीब व जरूरत मंद व्यक्ति इस जगह पर आकर इन कपड़ों को अपने जरूरत एवं साइज के हिसाब से यहां से बिना कोई रुपये दिये बिल्कुल मुफ्त में ले जा सकते हैं.

क्या है इस दीवार को सजाने का मकसद :

बापन कहते हैं कि एक पुलिसकर्मी होने के कारण ड्यूटी के दौरान सड़कों पर मैंने कई ऐसे लोगों को देखा है, जिनके पास इस कड़ाके की ठंड में रुपये के अभाव में खुद को ठंड से सुरक्षित बचाने के लिए गर्म कपड़े नहीं हैं. इसके कारण वे मजबूरी में या तो फटी बोरियां या फटे पुराने कपड़े ओढ़कर ठिठुरते रहते हैं. ऐसे लोगों को देखकर मेरे मन में यह भावना जगी. मैंने अपने इलाके में कुछ लोगों से संपर्क किया और उन्हें उनके घर में पुराने व बेकार पड़े गर्म कपड़ों को उन्हें दे देने को कहा. लोगों ने भी उनका भरपूर साथ दिया. इसके बाद सैकड़ों की संख्या में लोगों ने उन्हें घरों से हर तरह के गर्म कपड़े दिये. उन कपड़ों को बापन इन दीवारों पर लाकर सजा देते हैं. बापन कहते हैं कि वह कुछ ऐसी अन्य जगहों की भी तलाश कर रहे हैं, जहां अगले कुछ दिनों में इसी तरह की दीवार सजाई जा सके.

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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