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AIIMS: शिव कुमार राउत. कोलकाता. पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में जल्द ही चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय शुरू हो सकता है. विश्वभारती विश्वविद्यालय ने एम्स की तर्ज पर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थापित करने की पहल की है. प्रस्तावित संस्थान का नाम ‘विश्वभारती मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल’ हो सकता है. यदि यह परियोजना मंजूरी पाती है, तो इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था को नयी दिशा मिलेगी, बल्कि बीरभूम जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का नक्शा भी बदल सकता है.
पहले ही सरकार के पास भेजा जा चुका है आवेदन
विश्वभारती के कार्यवाहक जनसंपर्क अधिकारी अतिग घोष ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ जोड़ने की विशेष पहल की है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल निर्माण के लिए प्रारंभिक आवेदन पहले ही किया जा चुका है. इससे आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलेगी और मेडिकल छात्रों को आधुनिक शिक्षा का अवसर प्राप्त होगा.
स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर रहती हैं शिकायतें
बोलपुर-शांतिनिकेतन क्षेत्र में लंबे समय से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर शिकायतें रही हैं. विश्व कवि रवींद्रनाथ ठाकुर को भी इलाज के लिए शांतिनिकेतन छोड़कर कोलकाता जाना पड़ा था. इसके अलावा उनके पुत्र रथींद्रनाथ ठाकुर, पूर्व सांसद सोमनाथ चटर्जी और साहित्यकार बुद्धदेव गुहा सहित कई प्रतिष्ठित लोगों को बेहतर इलाज के अभाव में शांतिनिकेतन छोड़ना पड़ा था. कोरोना काल में भी शांतिनिकेतन के बुजुर्ग आश्रमवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था.
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केंद्र सरकार से सहमति का इंतजार
विश्वभारती में पहले से ही दो अस्पताल पियर्सन मेमोरियल हॉस्पिटल और दीनबंधु एंड्रूज मेमोरियल हॉस्पिटल मौजूद हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि इन दोनों अस्पतालों को प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज से जोड़ा जायेगा. विश्वविद्यालय ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल निर्माण की अनुमति के लिए केंद्र सरकार के पास आवेदन भी भेज दिया है. हालांकि, अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राज्य सरकार की सहमति पर निर्भर करेगी.
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