खास बातें
TMC MLAs Meet Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में पालाबदल शुरू होने से पहले इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है. बंगाल विधानसभा के स्पीकर और मुख्यमंत्री से तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों की मुलाकात के बाद टीएमसी के कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने वालों में सांसद काकोली घोष दस्तीदार, अरूप चक्रवर्ती और सुशांत घोष शामिल हैं.
काकोली घोष ने टीएमसी के आंतरिक कामकाज पर जताया असंतोष
तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के प्रति सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त करने वाली लोकसभा सदस्य काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. हाल में वह टीएमसी के प्रमुख कार्यक्रमों से अनुपस्थित रहीं. पार्टी के आंतरिक कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया. दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, वह सांसद बनी रहेंगी.
टीएमसी में कई पदों पर रहीं काकोली
काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी में कई पदों पर कार्य किया. वह पार्टी की महिला इकाई की अध्यक्ष भी रहीं. टीएमसी नेतृत्व की आपत्तियों के बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई प्रशासनिक बैठक में भाग लिया था.
इसे भी पढ़ें : टीएमसी में बगावत! काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा, I-PAC पर फोड़ा हार का ठीकरा, ममता को दी सलाह- ‘भूंइफोड़’ संस्थाओं से बचें
स्पीकर रथिंद्र बोस से मिले ऋतब्रत और संदीपन
विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर मची रार अब खुलकर सामने आने लगी है. काकोली घोष दस्तीदार, अरूप चक्रवर्ती और सुशांत घोष के इस्तीफे से पहले राज्य में उस वक्त सिसायी पारा चढ़ गया, जब टीएमसी के 2 कद्दावर विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने अचानक विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस से मुलाकात की.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
क्या टीएमसी के कुछ और ‘विकेट’ गिरने वाले हैं?
चौंकाने वाली बात यह है कि बंद कमरे में हुई इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां मौजूद थे. बंद कमरे में हुई इस चर्चा ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि क्या टीएमसी के कुछ और ‘विकेट’ गिरने वाले हैं.
शिष्टाचार या पॉलिटिकल शिफ्ट की तैयारी?
आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को ‘शिष्टाचार भेंट’ का नाम दिया गया है, लेकिन इसके पीछे की टाइमिंग कई गहरे सवाल खड़े करती है. मुलाकात ऋतब्रत बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी की दिल्ली स्थित पुराने ‘बंग भवन’ में हुई गुप्त मीटिंग के कुछ ही दिनों बाद हुई है.
इसे भी पढ़ें : अब सुखेंदु शेखर रॉय के बागी तेवर, बोले- बंगाल में अराजकता का हुआ अंत, क्या ममता बनर्जी के करीबियों पर गिरेगी गाज?
ममता बनर्जी की बैठक में ऋतब्रत ने चुनाव प्रबंधन पर उठाये थे सवाल
ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा वही नेता हैं, जिन्होंने चुनाव में टीएमसी को मिली करारी हार के बाद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा बुलायी गयी इंटरनल मीटिंग में नेतृत्व और चुनावी प्रबंधन पर तीखे सवाल दागे थे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के विधायकों का सीधे मुख्यमंत्री और स्पीकर से मिलना महज संयोग नहीं हो सकता.
मैंने उनके नेतृत्व में राजनीति की है – संदीपन साहा
विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष से बाहर निकलने के बाद दोनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान थी. हालांकि, पत्रकारों के सवालों ने उन्हें असहज कर दिया. ऋतब्रत ने कहा- हम रचनात्मक विपक्ष (Constructive Opposition) की भूमिका निभाते रहेंगे. स्पीकर साहब को बधाई नहीं दे पाया था, इसलिए मिलने आये. मुख्यमंत्री वहां थे, तो उनसे भी अभिवादन हुआ. संदीपन साहा ने कहा- मैं शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में काम कर चुका हूं. उनसे मिलना कोई अपराध नहीं है.
इसे भी पढ़ें : टीएमसी में बगावत! काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा, I-PAC पर फोड़ा हार का ठीकरा, ममता को दी सलाह- ‘भूंइफोड़’ संस्थाओं से बचें
टीएमसी के भीतर ‘अविश्वास’ का माहौल
ममता बनर्जी की पार्टी के लिए यह स्थिति चिंताजनक है. ऋतब्रत और संदीपन जैसे युवा और प्रभावी चेहरों का मुख्यमंत्री के प्रति नरम रुख यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा अब भविष्य की तलाश में है. दोनों विधायक पहले ही कह चुके हैं कि टीएमसी ने चुनाव के दौरान जमीनी फीडबैक को नजरअंदाज किया.
शुभेंदु अधिकारी की बढ़ती स्वीकार्यता
मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने विपक्ष के विधायकों के लिए ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ रखा है, जो टीएमसी की नींव हिलाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है.
TMC MLAs Meet Suvendu Adhikari: क्या पश्चिम बंगाल में होने वाला है बड़ा उलटफेर?
विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बैठक में विधानसभा की समितियों (Committees) और क्षेत्र के विकास कार्यों पर चर्चा हुई. लेकिन राजनीति में ‘शिष्टाचार’ अक्सर ‘पालाबदल’ की पहली सीढ़ी होती है. अब देखना यह है कि कालीघाट (ममता बनर्जी का आवास) से इन दोनों विधायकों के खिलाफ क्या एक्शन लिया जाता है.
इसे भी पढ़ें
बंगाल चुनाव 2026 में हार के बाद ‘कॉकरोच’ के सहारे ममता-अभिषेक! वायरल CJP का किया समर्थन
सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन
