तृणमूल विधायक जीवन कृष्ण साहा ने धन जुटाने वाले एजेंट की भूमिका निभायी : इडी

इडी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि तृणमूल के गिरफ्तार विधायक जीवन कृष्ण साहा ने पश्चिम बंगाल में सहायक शिक्षकों के पद पर नौकरी दिलाने के बदले में अयोग्य उम्मीदवारों से भारी मात्रा में धन इकट्ठा किया.

एजेंसियां, संवाददाता, नयी दिल्ली/कोलकाता प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के गिरफ्तार विधायक जीवन कृष्ण साहा ने पश्चिम बंगाल में सहायक शिक्षकों के पद पर नौकरी दिलाने के बदले में अयोग्य उम्मीदवारों से अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भारी मात्रा में धन इकट्ठा करने के लिए एक एजेंट के रूप में काम किया. मुर्शिदाबाद जिले के बुरवान विधानसभा क्षेत्र से विधायक साहा को सोमवार को इडी ने उनके आवास पर छापेमारी के बाद गिरफ्तार कर लिया था. छापेमारी साहा के सहयोगियों और प्रसन्न कुमार राय नाम के एक कथित बिचौलिये के परिसरों पर भी की गयी थी. कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट स्थित विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने सोमवार को साहा को छह दिनों के लिए इडी की हिरासत में भेज दिया. मामला पश्चिम बंगाल सरकार के विद्यालयों में सहायक अध्यापकों (कक्षा नौ-12वीं) की कथित अवैध नियुक्तियों से संबंधित है और आरोप है कि ऐसा स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के अधिकारियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र के तहत किया गया.इस साल अप्रैल में, सुप्रीम कोर्ट ने एसएससी द्वारा शिक्षकों और कर्मचारियों के रूप में नियुक्त किये गये 25,000 से ज्यादा उम्मीदवारों की नियुक्तियों को धोखाधड़ी करार देते हुए रद्द कर दिया था. इडी ने कहा: अपराध की आय (अवैध धन) उनके अपने और उनकी पत्नी के बैंक खातों में जमा की गयी थी. एजेंसी ने कहा कि विभिन्न अभ्यर्थियों ने इडी के पास दर्ज अपने बयानों में नियुक्तियों के बदले साहा को ‘सीधे’ नकद भुगतान करने की ‘पुष्टि’ की है. इडी अधिकारी साहा के बैंक रिकॉर्ड की जांच में जुटे हैं. इडी का मानना है कि जीवन कृष्ण साहा और उनकी पत्नी के बैंक खातों में कई किस्तों में 46 लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा हुई है. इसमें से आधे से ज्यादा यानी लगभग 26 लाख रुपये साहा की पत्नी के खाते में जमा हुए है. यह पैसा गिरफ्तार आरोपी की पत्नी के खाते में सिर्फ चार महीनों (दो सितंबर से 14 दिसंबर 2020 के बीच) में जमा हुआ. साहा और उनकी पत्नी दोनों ही सरकारी कर्मचारी हैं. इडी सूत्रों के अनुसार, उनके पास वेतन के अलावा आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है. ऐसे में जांचकर्ताओं को संदेह है कि सिर्फ चार महीनों में यह पैसा उनके खाते में कैसे आया. सात लोगों ने साहा के बैंक खाते में भेजे थे रुपये: वित्तीय लेन-देन से संबंधित कई जानकारी पहले ही जांचकर्ताओं के हाथ लग चुकी है. उनमें से एक संजीत मंडल का नाम सामने आया है. इडी सूत्रों का दावा है कि उसने 2019 में दो मौकों पर साहा के बैंक खाते में 11.5 लाख रुपये भेजे. एक बार उसने पांच लाख रुपये और दूसरी बार उसने 6.5 लाख रुपये साहा के खाते में भेजे. इसके अलावा दीपक दास ने 12 लाख रुपये, नवीन मंडल ने एक लाख रुपये, राणा मंडल ने आठ लाख रुपये (दो मौकों में) भेजे. अमित विश्वास ने एक लाख रुपये, आरिफ इकबाल ने 95,000 रुपये और प्रणयचंद्र विश्वास ने 12 लाख रुपये (तीन किस्तों में) साहा को भेजे. जांचकर्ताओं का यह भी दावा है कि विधायक ने 2022 में दीपक को पांच लाख रुपये लौटा दिये थे. हालांकि, यह पता नहीं चल पाया है कि उपरोक्त सात लोग कौन हैं और उनकी पहचान क्या है.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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