कोलकाता. भाजपा द्वारा चुनाव आयोग को माध्यम बनाकर एसआइआर के जरिये पश्चिम बंगाल के वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश के आरोप को सामने रखकर तृणमूल कांग्रेस ने अपने संगठन को पूरी तरह मैदान में उतार दिया है. पार्टी नेतृत्व का दावा है कि यह कदम तृणमूल के लिए नुकसान की बजाय संजीवनी साबित हुआ है. जहां आमतौर पर चुनाव से कुछ समय पहले ही कार्यकर्ता सक्रिय होते हैं. वहीं इस बार काफी पहले से ही जमीनी स्तर पर तैयारी और राजनीतिक संघर्ष शुरू कर दिया गया है. तृणमूल ने गुरुवार को अपने 28वें स्थापना दिवस के मौके पर पूरे जनवरी महीने के लिए राज्यव्यापी कार्यक्रमों की घोषणा की है. एक जनवरी को पार्टी का स्थापना दिवस मनाया गया. इस अवसर पर सुबह 9.30 बजे कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास में और 10 बजे बाइपास स्थित तृणमूल भवन में राष्ट्रीय ध्वज और पार्टी ध्वज फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. तृणमूल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया, जबकि साइंस सिटी के पास पुराने तृणमूल भवन में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने पार्टी का झंडा फहराया. पार्टी सूत्रों के अनुसार, एसआइआर के विरोध के साथ-साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार के 15 वर्षों के विकास कार्यों व विकास योजनाओं को लेकर भी तृणमूल जोरदार प्रचार में उतर रही है. इस विकास रिपोर्ट को पार्टी ने ‘उन्नयनेर पांचाली’ नाम दिया है. जनवरी महीने भर ब्लॉक और अंचल स्तर पर इसका प्रचार किया जायेगा. पार्टी के अनुसार, एसआइआर और विकास, दोनों ही मुद्दे भाजपा के खिलाफ आगामी चुनाव में मुख्य हथियार होंगे.तृणमूल का आरोप है कि भाजपा ने बंगाल के महापुरुषों को बार-बार गलत नाम और विकृत उच्चारण के जरिए अपमानित किया है. इसके विरोध में सात जनवरी तक प्रतिदिन महात्मा गांधी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद, डॉ बीआर आंबेडकर सहित बंगाल और देश के महान व्यक्तित्वों को विशेष सम्मान देने का निर्देश दिया गया है. इसके बाद 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती मनायी जायेगी और 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर सुभाष उत्सव ब्लॉक, वार्ड और क्षेत्र में हर जगह मनाया जायेगा. इसके अलावा, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के जश्न के साथ-साथ 30 जनवरी को गांधीजी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में पूरे सम्मान के साथ पालन किया जायेगा.
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