डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को कर दिया रद्द

फर्जी तरीके से कोर्ट में खुद को पत्नी बताकर एक शिक्षक से 10 हजार रुपये प्रति माह भरण पोषण लेने के एक मामले में सुनवाई करने के दौरान महिला की इस हरकत से जज भी हैरान रह गये

फर्जी तरीके से खुद को पत्नी बता ले रही थी भरण पोषणसंवाददाता, हावड़ा. फर्जी तरीके से कोर्ट में खुद को पत्नी बताकर एक शिक्षक से 10 हजार रुपये प्रति माह भरण पोषण लेने के एक मामले में सुनवाई करने के दौरान महिला की इस हरकत से जज भी हैरान रह गये. हावड़ा जिला अदालत में न्यायाधीश सुमन कुमार घोष ने भरण पोषण देने पर तुरंत रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि यह एक अपराध है. जानकारी के अनुसार, महिला अविवाहित है. उसके पिता रेलवे से रिटायर हुए थे. अविवाहित होने के कारण रेलवे से महिला को हर माह पेंशन मिलती थी. इसी बीच महिला के साथ शिक्षक की दोस्ती हुई. महिला ने साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज देकर निचली अदालत में यह साबित कर दिया कि शिक्षक उसका पति है और उसे हर महीने 10,000 रुपये भरण पोषण देने होंगे. निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए पीड़ित शिक्षक ने जिला अदालत में मामला दर्ज कराया. मामले की सुनवाई शुरू हुई. कोर्ट के समक्ष कई सबूत पेश किये गये. कोर्ट ने महिला से पूछा कि जब रेलवे की ओर से अविवाहित होने का पेंशन मिल रहा है, तो ऐसे में किसी की पत्नी बनना कैसे संभव हो गया. कोर्ट ने तुरंत निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया.

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By SUBODH KUMAR SINGH

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