राज्य में हिंसामुक्त चुनाव के लिए हाइकोर्ट में जनहित याचिका

कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल व न्यायाधीश पार्थ सारथी सेन की डिविजन बेंच पर बुधवार को राज्य में हिंसा मुक्त चुनाव की मांग करते हुए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. हालांकि, बुधवार को अदालत ने इस मामले में कोई ठोस फैसला नहीं सुनाया.

कोलकाता.

कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल व न्यायाधीश पार्थ सारथी सेन की डिविजन बेंच पर बुधवार को राज्य में हिंसा मुक्त चुनाव की मांग करते हुए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. हालांकि, बुधवार को अदालत ने इस मामले में कोई ठोस फैसला नहीं सुनाया. हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इस बार आयोग मतदान से संबंधित हिंसा के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनायेगा, चाहे वह मतदान से पहले हो, मतदान के दौरान हो या मतदान के बाद. बुधवार को दायर जनहित याचिका में पिछले चुनावों में मतदान से संबंधित हिंसा के मामलों का उल्लेख किया गया, जिसमें मतदाताओं और विपक्षी पार्टी के एजेंटों को धमकाना, और यहां तक कि राज्य में राजनीतिक गुंडों द्वारा महिलाओं की गरिमा पर आघात के मामले शामिल थे. जनहित याचिका में अन्य मांगों में राज्य के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तत्काल तैनाती, सीसीटीवी की स्थापना और इस बार सभी बूथों में वीडियोग्राफी की व्यवस्था शामिल है. याचिकाकर्ता ने पश्चिम बंगाल में तीन-स्तरीय पंचायत प्रणाली के चुनावों में 2018 और 2023 में अभूतपूर्व रक्तपात और हिंसा का भी उल्लेख किया. इस मामले की सुनवाई अभी जारी है, इसलिए अदालत ने फिलहाल कोई फैसला नहीं सुनाया.

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By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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