कोलकाता.
भाजपा के आइटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जतायी. उन्होंने मुख्यमंत्री के उस दावे को भ्रामक बताया, जिसमें निर्वाचन आयोग द्वारा निलंबित सात सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को राज्य सरकार के अन्य कार्यों में समाहित करने की बात कही गयी थी.अमित मालवीय ने कहा कि इन अधिकारियों का निलंबन निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियों के तहत किया गया है. उन्होंने 21 सितंबर 2000 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारी उस अवधि में पूरी तरह निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र में आते हैं.उन्होंने कहा कि कानून की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28ए के तहत चुनावी कार्यों में लगे अधिकारियों पर निर्वाचन आयोग का पूर्ण अधिकार स्थापित है, जिसमें अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की शक्ति भी शामिल है. अमित मालवीय ने कहा कि कोई भी राज्य सरकार इस संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्था को कमजोर या दरकिनार नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को संविधान और कानून के अनुरूप कार्य करना चाहिए व चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता किसी भी राजनीतिक सुविधा से ऊपर है.अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के अधिकार में हस्तक्षेप करने या उसे कमजोर करने के प्रयास स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की बुनियाद पर सीधा आघात हैं.
