Supreme Court Slams Bengal Govt: कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण में को बाधित करने को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को जमकर फटकार लगायी. शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि आम जनता के हित से जुड़ी विकास परियोजनाओं का राजनीतिकरण कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए साफ किया कि अधिकारियों का हठी रवैया जनहित में बाधक बन रहा है.
मुख्य सचिव और DGP पर होनी चाहिए थी कार्रवाई
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति काफी उदारता दिखायी है. सीजेआई ने कहा- यह आपके संवैधानिक कर्तव्यों की पूरी तरह अनदेखी को दर्शाता है. यह ऐसा मामला था, जिसमें मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी. आप अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं.
आचार संहिता और बोर्ड परीक्षाओं का बहाना भी खारिज
पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने दलील दी कि चुनाव के कारण प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू है और बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं. इसलिए निर्माण के लिए सड़कें बंद करना मुश्किल है. इस पर जस्टिस बागची ने सख्त लहजे में कहा- क्या आपके लिए त्योहार और चुनाव विकास से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं? यह आपकी इच्छा नहीं, आपका कर्तव्य है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह प्रोजेक्ट पहले से चल रहा है, इसलिए चुनाव आयोग को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी.
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चिंगरीघाटा क्रॉसिंग पर फंसा है पेंच
मामला सॉल्ट लेक सेक्टर-5 को दक्षिण कोलकाता से जोड़ने वाली मेट्रो लाइन का है. ईएम बाईपास के भीड़भाड़ वाले चिंगरीघाटा क्रॉसिंग पर निर्माण कार्य को लेकर लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि ओवरहेड ट्रैक का काम 15 फरवरी 2026 तक पूरा किया जाये, लेकिन राज्य सरकार ने ट्रैफिक पुलिस की अनुमति और अन्य बहानों से इसे लटकाये रखा था.
जनता की सुविधा में बाधा न बनें, राज्य की अपील ठुकरायी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की मई तक समय बढ़ाने की अर्जी को ठुकराते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कोई खामी नहीं है. अदालत ने विश्वास जताया कि अब यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होगी और कोलकाता की जनता को राहत मिलेगी.
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