सहपाठी की कलम से छात्रा की आंख की रेटिना क्षतिग्रस्त, धुंधली हुई रोशनी, हुआ ऑपरेशन

जिले के बागनान थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंतुल महाकाली प्राइमरी स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा की एक आंख में सहपाठी की पेन से गंभीर चोट लगने के कारण उसकी रेटिना क्षतिग्रस्त हो गयी

अभिभावकों ने लगाया स्कूल पर लापरवाही का आरोप

संवाददाता, हावड़ा.

जिले के बागनान थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंतुल महाकाली प्राइमरी स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा की एक आंख में सहपाठी की पेन से गंभीर चोट लगने के कारण उसकी रेटिना क्षतिग्रस्त हो गयी. घायल छात्रा रीमा चक्रवर्ती को आनन-फानन में कोलकाता मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी आंख का ऑपरेशन किया. फिलहाल रीमा की उस आंख की रोशनी धुंधली हो गयी है और डॉक्टर अभी यह कह पाने की स्थिति में नहीं हैं कि उसकी दृष्टि पूरी तरह लौट पायेगी या नहीं.

कैसे हुआ हादसा : जानकारी के अनुसार, रीमा बाइनान के कन्हाईपुर गांव की रहने वाली है और बंतुल महाकाली प्राइमरी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती है. लगभग 10 दिन पहले, मिड-डे मील लेने के दौरान जब वह कतार में खड़ी थी, तभी पास में दो सहपाठी आपस में झगड़ने लगे. इसी दौरान एक बच्चे ने जोश में आकर पेन निकाला और छीना-झपटी में वह सीधा रीमा की आंख में लग गया.

चोट लगने के बाद उसकी आंख में तेज जलन शुरू हो गयी. वहां मौजूद शिक्षक ने पानी से आंख धोने की कोशिश की, लेकिन हालत बिगड़ती चली गयी. इसके बाद रीमा को स्कूल में पढ़ने वाले उसके भाई के साथ घर भेज दिया गया.

इलाज में हुई देर, मां ने जतायी नाराजगी : रीमा की मां श्यामली चक्रवर्ती ने बताया कि बच्ची को पहले एक स्थानीय नेत्र चिकित्सक को दिखाया गया, जिन्होंने तुरंत उसे मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी. कोलकाता मेडिकल कॉलेज में चार दिन तक इलाज चला और ऑपरेशन भी हुआ. हालांकि ऑपरेशन के बाद भी रीमा को अभी तक स्पष्ट नहीं दिख रहा है और रोशनी धुंधली बनी हुई है. रीमा की मां का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण इलाज में देरी हुई. उन्होंने कहा : घटना के दो घंटे बाद बच्ची को घर भेजा गया, जबकि चोट आंख में थी. अगर तुरंत मेडिकल सहायता मिलती, तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती.

स्कूल प्रशासन ने मानी गलती

इस गंभीर मामले पर जब स्कूल की प्रधानाध्यापिका रीता अदक से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए माना कि लापरवाही जरूर हुई है. उन्होंने कहा : ऐसे मामलों में छात्रा को तुरंत चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

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