सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सरकार की सख्ती, 73 आवेदन खारिज

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सख्ती बरतते हुए 73 डॉक्टरों के आवेदन खारिज कर दिये हैं.

संवाददाता, कोलकाता

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सख्ती बरतते हुए 73 डॉक्टरों के आवेदन खारिज कर दिये हैं. सरकार का यह कदम आरजी कर अस्पताल में हुए आंदोलन के बाद आया है, जिसके बाद विभाग ने नियमों को कड़ाई से लागू करने का फैसला किया है. स्वास्थ्य विभाग ने जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर और विभिन्न विभागों के स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर के आवेदनों को खारिज कर दिया है.

ये डॉक्टर बांकुड़ा, दक्षिण 24 परगना, नादिया, बर्दवान, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली, बीरभूम, कूचबिहार, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और दार्जिलिंग जैसे जिलों से हैं. जिन विभागों के डॉक्टरों के आवेदन खारिज हुए हैं, उनमें मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री रोग, ईएनटी, पीडियाट्रिक, पैथोलॉजी, एनेस्थिसियोलॉजी, नेत्र, ऑर्थोपेडिक्स और त्वचा रोग शामिल हैं.

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन आवेदनों को तीन मार्च 1993 को जारी एक पुराने नियम के तहत खारिज किया गया है. इस नियम के मुताबिक, किसी भी सरकारी डॉक्टर को निजी प्रैक्टिस के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) पाने के लिए अपने नये कार्यभार की शुरुआत में ही आवेदन करना होता है. जिन 73 डॉक्टरों के आवेदन खारिज हुए हैं, उन्होंने इस नियम का पालन नहीं किया था. इसके चलते उन्हें एनओसी नहीं दी गयी. ऐसी भी जानकारी मिली है कि इन डॉक्टरों का तबादला भी किया जा सकता है. सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर लंबे समय से बहस होती रही है, क्योंकि कई डॉक्टर शाम चार बजे के बाद अपने सरकारी कार्यस्थल पर उपलब्ध नहीं होते और निजी प्रैक्टिस करते हैं. अब इस सख्ती से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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