भाजपा के जुलूस में फिर लगे नारे ‘बंटेंगे तो कटेंगे, एक हैं तो सेफ हैं ’

शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार व मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के विरोध में प्रदेश भाजपा की ओर से रविवार को कॉलेज स्क्वायर से रानी रासमणि एवेन्यू तक महाजुलूस निकाला गया.

कॉलेज स्क्वायर से रानी रासमणि एवेन्यू तक निकाला गया जुलूस

बोले दिलीप घोष- तृणमूल को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं

संवाददाता, कोलकाता.

शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार व मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के विरोध में प्रदेश भाजपा की ओर से रविवार को कॉलेज स्क्वायर से रानी रासमणि एवेन्यू तक महाजुलूस निकाला गया. शीर्ष के नेताओं को जुलूस में एक साथ चलते हुए देखा गया.

जुलूस में प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष, सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, लॉकेट चटर्जी, पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा, विधायक अग्निमित्रा पाल, तापस राय सहित अन्य नेता मौजूद रहे. जुलूस शुरू होने से पहले नेताओं ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि विरोध सिर्फ शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार को लेकर नहीं है. सबसे पहले सुकांत, शुभेंदु व दिलीप घोष मुरलीधर सेन लेन पार्टी कार्यालय में पहुंचे. यहां से कॉलेज स्क्वायर पहुंचे. तीनों नेताओं ने कहा कि सिर्फ नियुक्ति भ्रष्टाचार का विरोध नहीं होगा, बल्कि मुर्शिदाबाद की घटना का भी पुरजोर विरोध होगा. उनका कहना था कि सारे मतभेद भूलकर सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को एकजुट होना होगा. यदि एकजुट होकर आंदोलन किया जायेगा तो ममता बनर्जी सरकार की मियाद एक साल भी नहीं रहेगी. अपने संबोधन में तीनों नेताओं ने एक दूसरे की अहमियत का उल्लेख किया. आज की सभा में यह साफ कर दिया कि अब कोई मतभेद नहीं है, सभी मिल कर आगे बढ़ेंगे. जुलूस में यह नारे भी लगाये गये कि ””””बटेंगे तो कटेंगे, एक हैं तो सेफ हैं.”””” जुलूस में कोलकाता व पासवर्ती जिलों के कार्यकर्ताओं को शामिल होने के लिए बुलाया गया था. सभा मंच से दिलीप घोष ने ममता सरकार को बेदखल का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समय से पहले ही तृणमूल सरकार गिर जायेगी.

यहां की सरकार ने पूरी दुनिया के सामने बंगालियों का सिर झुका दिया है. उन्होंने कहा कि यदि बीएसएफ व सीआरपीए को ही बार-बार चुनाव कराना पड़े, लोगों की सुरक्षा उनके माध्यम से करनी पड़े, तो फिर कटमनी सरकार की जरूरत क्यों है. इस सरकार का आज ही विसर्जन कर देना चाहिए. सत्ता में तृणमूल को बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. अब एक साल और कष्ट नहीं करना पड़े, इसलिए पहले ही सरकार का विसर्जन जरूरी है.

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