मतदाता सूची में सुधार और जोड़ने के बजाय नाम काटने की प्रक्रिया है एसआइआर

ममता बनर्जी ने अपने पत्र में निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और चुनाव प्रक्रिया के दौरान मनमानी करने का आरोप लगाया.

By AKHILESH KUMAR SINGH | January 11, 2026 1:35 AM

ममता ने सीइसी को फिर लिखा पत्र

निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक पक्षपात व चुनाव प्रक्रिया के दौरान मनमानी करने का लगाया आरोप

कहा : हम जानते हैं आप जवाब नहीं देंगे, लेकिन परिस्थितियों से अवगत कराना हमारा कर्तव्य है

संवाददाता, कोलकातामुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीइसी) ज्ञानेश कुमार को फिर पत्र लिखकर आरोप लगाया कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया रिकॉर्ड सही करने के बजाय मतदाताओं के नाम हटाने की कवायद बना दी गयी है. सुश्री बनर्जी ने अपने पत्र में निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और चुनाव प्रक्रिया के दौरान मनमानी करने का आरोप लगाया. उन्होंने तीन पन्नों के पत्र में कहा कि सुनवाई की प्रक्रिया काफी हद तक यांत्रिक हो गयी है, जो पूरी तरह से तकनीकी आंकड़ों द्वारा संचालित है और इसमें विवेक, संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण का पूरी तरह अभाव है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य ‘न तो सुधार करना है और न ही नाम जोड़ना, बल्कि केवल नाम काटना है.’ ममता बनर्जी ने दावा किया कि वर्तनी या उम्र संबंधी मामूली त्रुटियों के कारण आम लोगों को जबरन सुनवाई, उत्पीड़न और वेतन हानि का सामना करना पड़ रहा है. एसआइआर प्रक्रिया की खामियों को लेकर आयोग पर साधा निशानासुश्री बनर्जी ने एसआइआर की कथित खामियों पर प्रकाश डाला है. उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (इसीआइ) की तरफ से चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया के दौरान आम नागरिकों को जिस तरह से लगातार परेशान किया जा रहा है, उससे मैं अत्यंत स्तब्ध और विचलित हूं. तृणमूल सुप्रीमो ने कहा है कि यह चौंकाने वाली बात है कि एक ऐसा अभियान जो रचनात्मक और फलदायी होना चाहिए था, उसमें पहले ही 77 मौतें हो चुकी हैं, चार लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया है, और 17 लोग बीमार पड़ गये हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है. इसका कारण इसीआइ द्वारा बिना योजना के किये गये इस अभियान के कारण डर, धमकियां और अत्यधिक कार्यभार है.

अमर्त्य सेन सहित अन्य बुद्धिजीवियों को नोटिस दिये जाने पर किया कटाक्ष

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन, एक 90 वर्षीय और विश्व स्तर पर सम्मानित बुद्धिजीवी, को अपनी योग्यता साबित करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया है. इसी तरह, प्रख्यात कवि और पुरस्कार विजेता जॉय गोस्वामी, लोकप्रिय फिल्म अभिनेता और सांसद दीपक अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और भारत सेवाश्रम संघ के महाराज जैसी प्रतिष्ठित और व्यापक रूप से सम्मानित हस्तियों को भी इस अनियोजित, असंवेदनशील और अमानवीय प्रक्रिया का सामना करना पड़ा है. सुश्री बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि हालांकि अब बहुत देर हो चुकी है, उम्मीद है कि समझदारी से काम लिया जायेगा और राज्य के आम नागरिकों की परेशानी, असुविधा और पीड़ा को कम करने के लिए आपकी ओर से उचित सुधारात्मक कार्रवाई की जायेगी. पत्र के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम जानते हैं, आप इसका जवाब नहीं देंगे, लेकिन परिस्थितियों से आपको अवगत कराना हमारा कर्तव्य है.

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