SIR ट्रिब्यूनल में 81 फीसदी याचिकाएं वोटर लिस्ट से नाम हटाने की, जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

Supreme Court On Bengal SIR Voter List: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन (SIR) के बाद गठित अपीलीय न्यायाधिकरणों में 38.1 लाख अपीलों में से 81.3 प्रतिशत नाम हटाने के लिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 2029 लोकसभा चुनाव से पहले इन अपीलों के निपटारे का निर्देश दिया है.

Supreme Court On Bengal SIR Voter List: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद गठित अपीलीय न्यायाधिकरणों (Appellate Tribunals) के समक्ष लंबित मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जो आंकड़ा सामने आया है, वह बताता है कि ट्रिब्यूनल्स में लंबित कुल 38.1 लाख अपीलों में से 81.3 प्रतिशत (लगभग 31 लाख) याचिकाएं लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने (Exclusion) के लिए दाखिल की गयीं हैं, न कि नाम कटने के खिलाफ.

नाम काटने की अपील बढ़ा रहे ट्रिब्यूनल का बोझ

कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मिले जवाब के आंकड़ों को शीर्ष अदालत के सामने रखते हुए याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि मतदाता सूची से वंचित लोगों से ज्यादा अपील नाम वोटर लिस्ट से नाम कटवाने से जुड़ी है. यह ट्रिब्यूनल पर बोझ बढ़ा रहा है.

2029 लोकसभा चुनाव से पहले SIR की सुनवाई पूरी करने का निर्देश

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि अपीलों के निपटारे की पूरी कवायद लोकसभा चुनाव 2029 से काफी पहले पूरी हो जानी चाहिए. पीठ ने माना कि जिनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया है, उनका मतदान का अधिकार तुरंत प्रभावित होता है. इसलिए जिनके नाम कटे हैं, उनकी सुनवाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी से पूछा- SIR में नाम कटने के आधार पर बंगाल में फिर से चुनाव का दे सकते हैं आदेश?

सुप्रीम कोर्ट ने ECI से मांगा विस्तृत हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को जिला-वार और श्रेणी-वार विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह बताने को भी कहा है कि कितनी अपीलें लंबित हैं, कितने आवेदनों पर फैसला हो चुका है और निपटारे को गति देने के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं.

RTI से हुआ खुलासा

  • कुल लंबित अपीलें (7 अगस्त तक): 38,10,620
  • नाम हटाने/अस्वीकृत करने की अपीलें : लगभग 31,00,000 (81.3 प्रतिशत)
  • नाम कटने के खिलाफ मतदाताओं की अपील : लगभग 7,00,000
  • अब तक निपटाये गये मामले : 82,782 (इनमें से 91 प्रतिशत से अधिक यानी 75,443 मामलों में नाम फिर से जोड़े गये हैं, जबकि केवल 7,339 नाम हटाये गये हैं).

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला- एसआईआर में जिन लोगों के नाम कट गये, उनको नहीं मिलेगा राशन

कल्याण बनर्जी ने किया खास विधानसभा क्षेत्रों का जिक्र

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए. तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने भी विधानसभा क्षेत्रों में नाम काटने के आंकड़ों का उल्लेख किया, हालांकि पीठ ने कहा कि वह किसी विशेष विधानसभा क्षेत्र की बजाय पूरे राज्य में अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया की समीक्षा करेगी.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबा अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं.

अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है.

वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं.

भौगोलिक विशेषज्ञता : वर्तमान में उनका फोकस पश्चिम बंगाल है. उन्होंने झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की खबरों पर भी काम किया है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है.

मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :-

राज्य की राजनीति और शासन : वर्पतमान में श्चिम बंगाल की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज.

सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग.

जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित रिपोर्टिंग.

डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है.

विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर पत्रकारिता, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव और तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >