''''नलेन गुड़ संदेश'''' समेत सात उत्पादों को विशेष भौगोलिक पहचान का दर्जा मिला

पश्चिम बंगाल की मशहूर मिठाई ''नलेन गुड़ संदेश'' और बारुईपुर का अमरूद सहित राज्य के सात उत्पादों को विशेष भौगोलिक पहचान (जीआइ) का दर्जा मिला है.

संवाददाता, कोलकाता.

पश्चिम बंगाल की मशहूर मिठाई ””””नलेन गुड़ संदेश”””” और बारुईपुर का अमरूद सहित राज्य के सात उत्पादों को विशेष भौगोलिक पहचान (जीआइ) का दर्जा मिला है. राज्य सरकार के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस कदम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने और राज्य के पारंपरिक प्रसाद को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद है. ताजा ””””छेना”””” और ””””नलेन गुड़”””” (खजूर का गुड़) से बना सर्दियों का मीठा व्यंजन ””””नलेन गुड़ संदेश”””” की बंगाली घरों में खास अहमियत है. दक्षिण कोलकाता के एक मिठाई बनानेवाले ने कहा, यह गुड़ सर्दियों में बनने वाले संदेश मिठाई की जान है. इसके बिना सर्दियों का संदेश वैसा नहीं हो पायेगा. “खजूर के गुड़ को अब आधुनिक पैकेजिंग में बेचा जाता है और इसकी उपयोगिता अवधि भी लंबी होती है, जिससे भविष्य में इसके विस्तार की उम्मीद जगी है. खजूर के इस गुड़ का इस्तेमाल एक और पारंपरिक मिठाई ””””जॉयनगर मोया”””” में भी किया जाता है, जिसे कुछ साल पहले ‘जीआइ टैग’ मिला था. इस बार पश्चिम बंगाल के कुल सात उत्पादों को जीआइ टैग मिला है. इसमें कमरपुकुर का सफेद ””””””””बोंदे””””””””, मुर्शिदाबाद का ””””छनबोरा””””, बिष्णुपुर का ””””मोतीचूर लड्डू””””, राधुनीपगल चावल और मालदा का निस्तारी रेशमी धागा भी शामिल हैं.

फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ कॉटेज एंड स्मॉल इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एच के गुहा ने कहा, “सात नये उत्पादों के लिए जीआइ टैग की घोषणा एक बड़ा कदम है. विभिन्न क्षेत्रों में पाये जाने वाले कई खाद्य उत्पादों को अभी भी अपनी पहचान का इंतजार है. ” पश्चिम बंगाल को अब तक हस्तशिल्प, वस्त्र, चाय, खाद्य पदार्थ और कला रूपों सहित 26 उत्पादों के लिए जीआई पहचान मिल चुके हैं. विज्ञान, प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में जिलों में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं.

पश्चिम बंगाल अब मगराहाट के पारंपरिक चांदी शिल्प के अलावा शक्तिगढ़ के ””””लेंगचा””””, कृष्णनगर के ””””स्वर पुड़ी””””, राणाघाट के ””””पंतुआ”””” जैसी मिठाइयों के लिए जीआइ पहचान पर जोर दे रहा है. पूरे भारत में 500 से अधिक उत्पादों को जीआइ मान्यता मिल चुकी है.

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