जीवन कृष्ण साहा को झटका जमानत याचिका हुई खारिज

राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुईं नियुक्तियों के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किये गये तृणमूल कांग्रेस के विधायक जीवन कृष्ण साहा को गुरुवार को एक बार फिर अदालत से झटका लगा. घोटाले से जुड़े मामले में कोलकाता स्थित ईडी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी.

कोलकाता.

राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुईं नियुक्तियों के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किये गये तृणमूल कांग्रेस के विधायक जीवन कृष्ण साहा को गुरुवार को एक बार फिर अदालत से झटका लगा. घोटाले से जुड़े मामले में कोलकाता स्थित ईडी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने साहा को 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. गुरुवार को हुई सुनवाई में ईडी ने अदालत में कई गंभीर दावे किये. ईडी के वकीलों ने कहा कि जांच में कुछ अहम तथ्य मिले हैं, जिससे प्रारंभिक तौर पर पता चला है कि नियुक्ति घोटाले में बड़ी रकम केवल साहा ही नहीं, बल्कि उनके करीबी माने जाने वाले कुछ लोगों के बैंक खातों में जमा हुई. ईडी उन्हीं लोगों की पहचान करने में जुटी है. साहा के अलावा उनके करीबी लोगों के खातों से हुए लेन-देन की भी जांच की जा रही है.

ईडी का आरोप है कि नियुक्ति घोटाले में साहा को करीब 46 लाख रुपये मिलने को लेकर तथ्य मिले हैं. इस राशि में से 26 लाख रुपये विधायक की पत्नी के खाते में और 20 लाख रुपये उनके पिता के खाते में ट्रांसफर किये गये थे. वहीं, साहा के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को पहले ही लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. उन्होंने कहा कि कोई नयी तथ्यात्मक खोज नहीं हुई है, इसलिए जमानत मिलनी चाहिए. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले में गंभीर आर्थिक अपराध के संकेत हैं और 25 हजार युवाओं का जीवन इस घोटाले से प्रभावित हुआ है. न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल विधायक साहा को जमानत नहीं दी जा सकती.

गौरतलब है कि साहा को दो वर्ष पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने नियुक्ति घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. इस वर्ष की शुरुआत में उन्हें जमानत मिली थी, लेकिन अगस्त 2025 में ईडी ने उनके घर पर छापा मारने के बाद पुनः गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं.

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Published by: Bijay kumar

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