कोलकाता. माकपा की राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक के बाद पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान राज्य सचिव मोहम्मद सलीम बागी नेता प्रतीक उर रहमान से जुड़े सवाल पर नाराज हो गये. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस मामले पर अंतिम निर्णय पार्टी ही लेगी. पत्रकारों के सवाल के जवाब में सलीम ने कहा, “मैं यहां किसी की सुनवाई के लिए नहीं बैठा हूं. जब किसी ने कोई फरियाद नहीं की है, तो मैं कैसे कोई फैसला दे सकता हूं? प्रेस कॉन्फ्रेंस इन चीजों के लिए सही जगह नहीं है.” इससे पहले उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति और कार्यक्रम की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि माकपा अब भी उन धर्मनिरपेक्ष दलों से बातचीत के लिए इच्छुक है, जिन्होंने चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा से समान दूरी बनाये रखी है. प्रतीक उर रहमान के मुद्दे पर सलीम ने कहा कि पिछले दो महीनों से उनके खिलाफ आरोप आ रहे थे. पार्टी के पास एक आंतरिक समिति है, जहां ऐसे मामलों को भेजा जाता है. मैंने खुद समस्या का समाधान करने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद से संबंध बिगड़ने लगे. सलीम ने आगे बताया कि उन्हें मीडिया से जानकारी मिली कि प्रतीक अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क में हैं.
पार्टी इस पर निर्णय लेगी. जब कोई फैसला होगा, आपको सूचित किया जायेगा. उन्होंने यह भी कहा कि प्रतीक की ‘ब्रांड वैल्यू’ माकपा ने बनायी है.ऐसे कार्यकर्ता को खोना उतना ही दर्दनाक है, जितना किसी माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खो देना. संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने प्रतीक को लेकर उठे सवालों पर पहले नाराजगी जताई, लेकिन बाद में विस्तार से जवाब दिया. उन्होंने कहा, “कौआ कान ले गया? पहले अपना कान पकड़कर देखो कि है या नहीं. वह (प्रतीक उर रहमान) किस पार्टी में शामिल हो गया है, मैंने नहीं सुना है.” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर कोई बस या ट्रेन से गिर रहा हो, तो उसे बचाने के लिए हाथ बढ़ाना पड़ता है. लेकिन यदि कोई बाढ़ के पानी में बह रहा हो, तो उसे बचाते समय सावधान रहना होगा. ताकि किसी को बचाने की कोशिश में हम खुद न बह जायें.”
