कच्चे जूट संकट पर ऋतब्रत ने केंद्र को लिखा पत्र, की हस्तक्षेप की मांग

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने कच्चे जूट के गहराते संकट को लेकर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.

सांसद ने चेताया, नीतिगत चूकों से जूट क्षेत्र गहरे आर्थिक और सामाजिक संकट की ओर

संवादादाता, कोलकाता.

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने कच्चे जूट के गहराते संकट को लेकर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने कहा है कि कच्चा जूट क्षेत्र एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट की ओर बढ़ रहा है, जिसका सबसे अधिक असर पश्चिम बंगाल के जूट उत्पादक इलाकों और जूट मिल क्षेत्रों पर पड़ रहा है.

सांसद ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि बीते वर्षों की नीतिगत चूकों का परिणाम है. कच्चे जूट के लिए किसी विश्वसनीय स्थिरीकरण तंत्र का अभाव और पीसीएसओ व जीबीटी के तहत अनियमित और अनिश्चित मांग व्यवस्था ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. इसके चलते जूट की कमी, अत्यधिक मूल्य अस्थिरता, मिलों में उत्पादन कटौती और रोजगार में गिरावट पूरे जूट इकोनॉमी में दिखाई दे रही है.

पत्र में उल्लेख किया गया है कि कच्चे माल की ऊंची कीमतों और कार्यशील पूंजी के दबाव के कारण कई जूट मिलें शिफ्ट घटा रही हैं या संचालन स्थगित कर रही हैं. इससे हजारों जूट मजदूरों के कामकाजी दिन और मजदूरी प्रभावित हो रही है. दूसरी ओर, जूट किसान भी असमंजस में हैं और उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा ऊंची कीमतें स्थायी नीतिगत समर्थन का नतीजा हैं या अस्थायी कमी का. सांसद ने आगाह किया कि कच्चे जूट संकट का असर सरकार की खाद्यान्न खरीद की पैकेजिंग व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. इससे वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्री के इस्तेमाल की आशंकाएं बढ़ रही हैं, जो जूट उद्योग के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकती हैं.

ऋतब्रत बनर्जी ने केंद्र सरकार से तीन अहम कदम उठाने की मांग की है. कच्चे जूट के लिए स्पष्ट स्थिरीकरण या बफर फ्रेमवर्क की घोषणा, पीसीएसओ मांग को पूर्वानुमेय और समान रूप से वितरित करना, और किसान हित में एमएसपी संचालन को मजबूत करना. उन्होंने कहा कि जूट केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि लाखों किसानों और मजदूरों की आजीविका तथा देश की रणनीतिक पैकेजिंग जरूरतों का आधार है. समय पर निर्णायक कदम नहीं उठाये गये तो इस क्षेत्र को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है.

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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