दस्तावेज न होने पर भी वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने का निर्देश
कोलकाता. एसआइआर के तहत मतदाता सूची से जुड़ी सुनवाई प्रक्रिया में यौनकर्मियों, किन्नर समुदाय और कुछ आदिवासी समूहों को बड़ी राहत मिली है. चुनाव आयोग ने इन वर्गों की कानूनी और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नया निर्देश जारी किया है, जिसका उद्देश्य उनके मतदान अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. नये निर्देश का मुख्य मकसद सामाजिक और कानूनी रूप से पिछड़े वर्गों को मतदाता सूची में शामिल होने में आने वाली बाधाओं को दूर करना और उनके वोटिंग अधिकारों की रक्षा करना है. अब तक एसआइआर के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए सुनवाई के समय कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होता था. हालांकि, कई मामलों में यौनकर्मी, किन्नर और आदिवासी समुदाय के लोग जरूरी दस्तावेजों के अभाव में मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करा पाते थे. चुनाव आयोग के नये नियमों के अनुसार, यदि इन वर्गों के मतदाताओं के पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं भी हैं, तब भी उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकेगा. ऐसे मामलों में निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (इआरओ) या संबंधित जिला अधिकारी पूछताछ और सत्यापन के माध्यम से मतदाता की पहचान सुनिश्चित करेंगे. यानी दस्तावेजों की कमी अब वोटर आइडी और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में बाधा नहीं बनेगी. आयोग की इस पहल की कई सामाजिक संस्थाओं ने सराहना की है. उनका कहना है कि इससे उन लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जो अब तक सामाजिक भेदभाव और कानूनी अड़चनों के कारण मतदान के अधिकार से वंचित रह जाते थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
