स्वास्थ्य के आधार पर पेटेंट अस्वीकार करना अवैध : हाइकोर्ट

पेटेंट कंट्रोलर ने इस आविष्कार को जन स्वास्थ्य और नैतिकता के आधार पर विशेष रूप से ई-सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 का हवाला देते हुए पेटेंट देने से मना कर दिया था.

कोलकाता. कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि किसी आविष्कार को केवल नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर वह भी बिना किसी वैज्ञानिक या तकनीकी साक्ष्य के पेटेंट देने से इनकार करना कानूनन टिकाऊ नहीं है. यह टिप्पणी जस्टिस रवि किशन कपूर ने निजी कंपनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें ऐसे हीटर असेंबली के पेटेंट की मांग की गयी थी, जो एरोसोल उत्पन्न करने के लिए डिजाइन किया गया था. पेटेंट कंट्रोलर ने इस आविष्कार को जन स्वास्थ्य और नैतिकता के आधार पर विशेष रूप से ई-सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 का हवाला देते हुए पेटेंट देने से मना कर दिया था. लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला पूर्वाग्रह पूर्ण था. केवल इस धारणा पर आधारित था कि सभी तंबाकू उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, जबकि इस मामले में आविष्कार के उपयोग से संबंधित कोई वैज्ञानिक या तकनीकी सबूत पेश नहीं किया गया. न्यायालय ने कहा कि पेटेंट कानून और नैतिकता का रिश्ता जटिल है और अधिनियम की धारा 3(बी) को इस तरह से नहीं पढ़ा जा सकता कि किसी भी व्यक्तिगत या सामाजिक चिंता के आधार पर बिना ठोस वैज्ञानिक प्रमाण के पेटेंट देने से मना कर दिया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि कंट्रोलर द्वारा दिया गया आदेश संक्षिप्त बिना कारणों के और बिना किसी उचित प्रक्रिया के पारित किया गया. न्यायालय ने इस पर भी जोर दिया कि पेटेंट का अर्थ यह नहीं होता कि किसी उत्पाद को कानूनन बेचने या उपयोग करने का अधिकार मिल गया हो. पेटेंट केवल दूसरों को उस तकनीक के उपयोग से रोकने का अधिकार देता है न कि इसे बाजार में उतारने या व्यापार करने का. सरकार के अन्य कानून या नियम यह तय करते हैं कि कोई आविष्कार व्यावसायिक रूप से लागू किया जा सकता है या नहीं. अंततः, न्यायालय ने पाया कि पेटेंट कंट्रोलर का निर्णय गलत तथ्यों और धारणाओं पर आधारित था. आविष्कार का तंबाकू से जुड़ा होना आवश्यक नहीं था, फिर भी कंट्रोलर ने यह मान लिया कि इसका प्रयोग केवल तंबाकू युक्त उत्पादों में ही होगा, जो कि एक गलत निष्कर्ष था. इसके चलते हाइकोर्ट ने पेटेंट न देने का आदेश रद्द करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए कंट्रोलर को वापस भेज दिया. यह फैसला वैज्ञानिक प्रगति, शोध और निष्पक्ष मूल्यांकन के महत्व को रेखांकित करता है और यह स्पष्ट करता है कि पेटेंट देने या न देने का निर्णय केवल धारणाओं पर नहीं बल्कि ठोस तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए.

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Published by: Ganesh mahto

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