सात राजनीतिक दलों का रद्द होगा पंजीकरण

पिछले छह वर्षों में राज्य में एक के बाद एक नये राजनीतिक दलों का गठन हुआ है. लेकिन दलों के गठन के बाद सारी गतिविधियां ठप रहीं.

संवाददाता, कोलकाता

पिछले छह वर्षों में राज्य में एक के बाद एक नये राजनीतिक दलों का गठन हुआ है. लेकिन दलों के गठन के बाद सारी गतिविधियां ठप रहीं. उनकी कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं, न वे कोई चुनाव नहीं लड़ रहे. उनका न कोई जनसंपर्क न कोई प्रचार कार्य हुआ है. चुनाव आयोग ने आठ ऐसे दलों को शोकॉज कर जवाब मांगा था. लेकिन सात राजनीतिक दलों ने शोकॉज का कोई जवाब नहीं दिया. इसलिए अब एक को छोड़कर शेष सात दलों की मान्यता रद्द कर दी जायेगी. आयोग ने सभी दलों को अवसर दिया था, लेकिन केवल ””मूल निवासी दल”” ही निर्धारित समय के भीतर उपस्थित हुआ और आवश्यक दस्तावेज जमा किये.

इस पार्टी की ओर से पूर्व आइपीएस नजरुल इस्लाम उपस्थित हुए थे. यह दल 2019 से नियमित रूप से निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ चुनाव लड़ रहा है. चूंकि शेष सात दलों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, इसलिए आयोग ने उनका पंजीकरण रद्द करने का निर्णय लिया है.

दिल्ली से राज्य चुनाव आयोग को हाल ही में भेजे गये एक निर्देश में कहा गया है कि 2019 से 2025 के बीच गठित इन आठ दलों की व्यावहारिक रूप से कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है. उन्होंने न तो कोई चुनाव लड़ा है, न ही कोई कार्यक्रम किया है और न ही उनका नाम कभी मीडिया में आया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये दल राजनीतिक दल के रूप में मान्यता पाने के लायक हैं भी या नहीं. राज्य चुनाव आयोग ने इन आठ दलों को शोकॉज कर प्रत्येक दल से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा था कि वे राजनीतिक रूप से निष्क्रिय क्यों हैं, क्या भविष्य में उनकी कोई राजनीतिक योजना है? इसके साथ ही उनकी सभी जानकारियां व दस्तावेज देने को कहा गया था. जिन आठ दलों के खिलाफ यह सवाल उठाया गया है, वे अलग-अलग जिलों से हैं. इनमें अखिल भारतीय अनुसूचित संयुक्त पार्टी, प्रकट स्वराज पार्टी, बांग्ला विकासवादी कांग्रेस, डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी (प्रभोद चंद्र), भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस, इंडियन पीपुल्स फॉरवर्ड ब्लॉक और मूल निवासी पार्टी ऑफ इंडिया शामिल हैं.

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