ममता को ग्रीन फाइल क्यों निकालनी पड़ी?
महानगर में आइ-पैक के कार्यालय पर इडी की छापेमारी के बाद सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस व मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. इस घटना को लेकर भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सवाल उठाया है कि एक मुख्यमंत्री को छापेमारी के दौरान खुद एक फाइल क्यों निकालनी पड़ी.
कोलकाता.
महानगर में आइ-पैक के कार्यालय पर इडी की छापेमारी के बाद सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस व मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. इस घटना को लेकर भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सवाल उठाया है कि एक मुख्यमंत्री को छापेमारी के दौरान खुद एक फाइल क्यों निकालनी पड़ी. हालांकि, सीएम ने दावा किया था कि उन्होंने तृणमूल का अध्यक्ष होने के नाते आइ-पैक के कार्यालय पर इडी की छापेमारी के दौरान हस्तक्षेप किया था. भाजपा ने अब इस दावे को खारिज कर दिया है. भाजपा के लोकसभा सांसद रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बंगाल के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर कथित हमले के मामले में कोई एफआइआर दर्ज नहीं की, लेकिन छापेमारी करने गये इडी अधिकारियों के खिलाफ मामला किया गया है. रविशंकर प्रसाद ने सवाल उठाया कि एक मुख्यमंत्री को छापेमारी के दौरान खुद एक फाइल क्यों निकालनी पड़ी? उन्होंने पूछा कि उस फाइल में ऐसा क्या सबूत था? क्या उसमें कोयला घोटाले के लाभार्थियों के नाम थे, हवाला के पैसे के रास्ते का पता था, या फिर तस्करी में मदद करने वाले तृणमूल के सदस्यों और अधिकारियों की सूची थी?रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की यह हताशा शायद हवाला के पैसे को गोवा विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी के प्रचार के लिए इस्तेमाल करने से जुड़ी हो सकती है.
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने इन छापों को चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार इडी का इस्तेमाल उनकी पार्टी को निशाना बनाने के लिए कर रही है, जबकि आइ-पैक उनकी पार्टी के सलाहकार के तौर पर काम कर रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
