मुख्य बातें
CAA in Bengal: कोलकाता/नयी दिल्ली. पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के काम और तेज किया जायेगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसके तहत भारतीय नागरिकता मांगने वाले आवेदनों पर निर्णय लेने के मकसद से दो और अधिकार प्राप्त समितियों का गठन किया. एक सरकारी आदेश में यह जानकारी दी गई. अधिकारियों ने बताया कि राज्य में पहले से ही ऐसी दो समितियां हैं, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने के मद्देनजर दो अतिरिक्त समितियों के गठन का निर्णय लिया गया.
उप सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे अध्यक्षता
इस नव गठित समिति की अध्यक्षता भारत सरकार के उप सचिव स्तर के या उससे उच्च रैंक के अधिकारी द्वारा की जाएगी. उस अधिकारी को भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त द्वारा नामित किया जाएगा. मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक राजपत्र अधिसूचना में कहा कि प्रत्येक अधिकार प्राप्त समिति में भारत सरकार के कम से कम अवर सचिव के पद या उससे उच्च रैंक के सहायक खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी समेत अन्य रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं. समिति में पश्चिम बंगाल के महा डाकपाल या उनके द्वारा नामित एक डाक अधिकारी भी शामिल होंगे.
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2024 में बनी थी पहली समिति
इससे पहले 11 मार्च 2024 को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, सीएए के तहत गठित अधिकृत समिति की अध्यक्षता निदेशक (जनगणना संचालन) कर रहे थे. इसमें सात अन्य सदस्य हैं. केंद्र सरकार ने 11 मार्च 2024 को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 को लागू किया और संसद द्वारा इस विवादास्पद कानून को पारित किए जाने के चार साल बाद नियमों को अधिसूचित किया गया. इसका उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उन गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया को तेज करना है, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके थे.
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