खास बातें
Raj Chakraborty TMC MLA: टॉलीवुड की चकाचौंध से निकलकर राजनीति के गलियारों में अपनी धमक बनाने वाले राज चक्रवर्ती आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. उत्तर 24 परगना के हालीशहर का एक लड़का जो कभी एक्टर बनने का सपना लेकर कोलकाता आया था. बाद में वह न केवल इंडस्ट्री का बड़ा निर्देशक बना, बल्कि ममता बनर्जी के भरोसेमंद विधायकों में शुमार हो गया.
राजनीति को कह दिया अलविदा
51 वर्षीय राज चक्रवर्ती की दो दुनिया थी. एक सिनेमा और दूसरी सियासत. 2026 के चुनाव में वह दूसरी बार बैरकपुर के मैदान में उतरे और हार गये. इस बार उनकी लड़ाई सिर्फ एक सीट जीतने की नहीं, बल्कि बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते अपने रसूख को साबित करने की भी थी. राजू चुनाव हारे, तो उन्होंने राजनीति से तौबा ही कर ली. साफ कह दिया- राजनीति मेरे वश का नहीं.
‘राजू’ का ‘राज’
राज चक्रवर्ती के नाम और काम के पीछे दिलचस्प कहानी है. उनका असली नाम राजू था. लेकिन टॉलीवुड में खुद को स्थापित करने के लिए उन्होंने यू (u) हटा दिया और बन गये राज. मजाकिया लहजे में इंडस्ट्री के लोग कहते हैं कि नाम से ‘यू’ हटने के बाद राज की किस्मत की चमक और बढ़ गयी.
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इंडस्ट्री का पावर सेंटर
टॉलीवुड में चर्चा है कि अब समीकरण बदल रहे हैं. कुछ लोग राज और देव की जोड़ी की तुलना हाथी के दांतों से करते हैं. देव दिखाने वाले दांत हैं, तो राज पर्दे के पीछे असली पावर गेम खेलने वाले दांत माने जाते हैं.
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अभिषेक का निर्देश और 15 दिन का ‘चमत्कार’
राजनीति में राज चक्रवर्ती इस कदर सक्रिय हुए थे कि अभिषेक बनर्जी के कहने पर रिकॉर्ड 15 दिन में सरकारी परियोजनाओं पर आधारित फिल्म ‘लक्ष्मी एलो घरे’ तैयार कर दी. इस फिल्म में ‘लक्ष्मी’ की मुख्य भूमिका राज की पत्नी और अभिनेत्री शुभश्री गांगुली ने निभायी.
Raj Chakraborty TMC MLA: पार्थ भौमिक से दोस्ती
राज को राजनीति में लाने और स्थापित करने में बैरकपुर के सांसद पार्थ भौमिक का हाथ रहा. बदले में राज ने भी पार्थ को अभिनय की दुनिया में ब्रेक देकर दोस्ती का फर्ज निभाया है.
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बैरकपुर के फर्स्ट ब्वॉय का फिटनेस पर है फोकस
राज अपनी फिटनेस को लेकर बहुत सजग रहते हैं. वह अपनी विधानसभा में भी उसी परफेक्शन के साथ काम करते हैं, जैसे अपनी फिल्मों के सेट पर.
मातृभाषा दिवस के दिन जन्मे, नाम पड़ा ‘शिबू’
राज चक्रवर्ती के जन्म से जुड़ा एक ऐसा तथ्य है, जो बहुत कम लोग जानते हैं. उनका जन्म 21 फरवरी 1975 को हुआ था, जिसे पूरी दुनिया ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ के रूप में मनाती है. हालांकि, उनके जन्म के समय तारीख से ज्यादा धार्मिक महत्व था. उस साल 21 फरवरी को महाशिवरात्रि थी. इसी वजह से घर में उनका नाम ‘शिबू’ रखा गया. आज भी उनके करीबी उन्हें इसी नाम से बुलाते हैं.
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बैरकपुर और टॉलीवुड में संतुलन बनाकर चलते रहे राज
सिनेमा के सेट से लेकर बैरकपुर की धूल भरी सड़कों तक, शिबू उर्फ राज चक्रवर्ती अपनी दोनों दुनिया में संतुलन बनाकर चलते रहे, लेकिन बैरकपुर की जनता ने इस निर्देशक को दोबारा अपनी सेवा का मौका नहीं दिया. तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं की तरह पार्टी नेतृत्व को कोसने की बजाय राज ने राजनीति से किनारा करना बेहतर समझा. उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया.
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