कौन हैं बंगाल में ‘कमल’ खिलाने वाले रणनीतिकार भूपेंद्र यादव, नबान्न की नींव हिलाने का तैयार किया गुप्त ब्लूप्रिंट

Bhupender Yadav Bengal Blueprint: पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के पीछे भूपेंद्र यादव को असली मास्टरमाइंड माना जा रहा है. फुटबॉल डिप्लोमेसी से लेकर आंगन बैठकों तक, जानें भूपेंद्र यादव ने कैसे तैयार किया बंगाल फतह का ब्लूप्रिंट.

Bhupender Yadav Bengal Blueprint: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आये ऐतिहासिक भूचाल के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा और शुभेंदु अधिकारी का संघर्ष है, तो पर्दे के पीछे कुछ ऐसे नाम हैं, जिन्होंने हार को जीत में बदलने की इंजीनियरिंग की. इनमें एक नाम है- केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव.

योग और रणनीति को बनाया हथियार

चुनावी राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले भूपेंद्र यादव ने बंगाल फतह के लिए एक ऐसा ‘साइलेंट ब्लूप्रिंट’ तैयार किया था, जिसकी भनक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रणनीतिकारों को अंत तक नहीं लगी. आज जब बंगाल में भाजपा की सरकार शपथ लेने जा रही है, तब हर तरफ भूपेंद्र यादव के उस ‘योग’ और ‘रणनीति’ की चर्चा है, जिसने ममता बनर्जी के अजय माने जाने वाले किले को ढाह दिया.

फुटबॉल से लेकर ‘आंगन बैठक’ तक भूपेंद्र का मास्टर प्लान

भूपेंद्र यादव ने बंगाल को समझने के लिए केवल फाइलों का सहारा नहीं लिया, बल्कि राज्य की नब्ज पकड़ने के लिए जमीन पर उतरे. उन्होंने युवाओं के बीच पैठ बनाने के लिए फुटबॉल के मैदानों की मदद ली. चुनाव को ‘ड्राइंग रूम’ से निकालकर ‘आंगन’ तक पहुंचाया. 1.65 लाख से ज्यादा घर-घर बैठकों का जाल बुना, जिसने चुपचाप मतदाताओं का मन बदल दिया. राजनीति को एक सामाजिक उत्सव में बदलते हुए ‘कमल मेला’ जैसे आयोजनों के जरिये उन लोगों को भी जोड़ा, जो सीधे राजनीति से नहीं जुड़े थे.

इसे भी पढ़ें : कौन हैं सुनील बंसल? जिनकी ‘साइलेंट’ रणनीति ने उड़ा दी ममता बनर्जी की नींद, सामने आया बीजेपी का सबसे बड़ा ‘गेमचेंजर’

बांचते चाई, बीजेपी ताई- वो नारा जिसने बदल दी हवा

भूपेंद्र यादव की रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा था- बांचते चाई, बीजेपी ताई (बचना चाहते हैं, इसलिए भाजपा) का नारा. इस नारे ने बंगाल के लोगों के भीतर छिपे डर और बदलाव की इच्छा को एक आवाज दी.

  • योग और संस्कृति का कनेक्शन : भूपेंद्र यादव ने लाहिड़ी महाशय के ‘योग’ और बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के जरिये खुद को राज्य की मिट्टी से जोड़ा.
  • संगठनात्मक ढांचा : उन्होंने पुराने कार्यकर्ताओं और नये नेताओं के बीच ऐसा संतुलन बनाया कि चुनाव के समय कोई आंतरिक कलह सामने नहीं आयी.
  • मौन रणनीतिकार : बड़े नेता रैलियों में व्यस्त थे, भूपेंद्र यादव जिला स्तर पर डेटा और फीडबैक के जरिये हर बूथ की निगरानी कर रहे थे.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Bhupender Yadav: 17वीं जीत और अटूट रिकॉर्ड

पश्चिम बंगाल का चुनाव भूपेंद्र यादव के लिए किसी सप्तदश (17वें) चुनावी प्रभार जैसा था. इससे पहले वे 16 राज्यों में भाजपा को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं. बंगाल की जीत ने उनके उस रिकॉर्ड को और मजबूत कर दिया है कि वे जहां कदम रखते हैं, वहां पार्टी की किस्मत बदल जाती है.

इसे भी पढ़ें : सुनील बंसल, जिसने ओडिशा से बंगाल तक बनवा दी बीजेपी सरकार, पढ़ें मोदी-शाह के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार की पूरी कहानी

भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल की जोड़ी

भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल की जोड़ी ने जिस तरह से बंगाल की जटिल राजनीति का पोस्टमॉर्टम किया, उसी का परिणाम है कि भाजपा 207 सीटों के साथ बंगाल की सत्ता पर काबिज होने जा रही है. यह जीत साबित करती है कि चुनाव केवल नारों से नहीं, बल्कि भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल जैसे ‘साइलेंट आर्किटेक्ट्स’ के सटीक ब्लूप्रिंट से जीते जाते हैं.

इसे भी पढ़ें

अमित शाह का बड़ा ऐलान- बंगाल में घुसपैठ और मवेशी तस्करी पर अब परमानेंट ब्रेक, अपराधी जायेंगे जेल

अभिषेक बनर्जी का VVIP रसूख खत्म, घर और दफ्तर की सुरक्षा घटी, अब आम आदमी की तरह होगा मूवमेंट

पीएम मोदी की तरह नंदीग्राम छोड़ भवानीपुर को चुनेंगे शुभेंदु अधिकारी या चुनेंगे नयी राह, फैसला 10 दिन में

रवींद्र जयंती पर 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेंगे भाजपा के नये सीएम, मौजूद रहेंगे पीएम मोदी और शाह

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >