प्राथमिक शिक्षकों ने शिक्षक दिवस कार्यक्रमों का किया बहिष्कार

शिक्षक दिवस पर सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार करते हुए शिक्षकों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा.

कोलकाता. शुक्रवार को शिक्षक दिवस के मौके पर बंगीय प्राथमिक शिक्षक समिति की ओर से एक सभा आयोजित की गयी. शिक्षकों ने भर्ती भ्रष्टाचार के कारण शिक्षकों के सम्मान को ठेस पहुंचाने और शिक्षा व शिक्षकों के जीवन में आये संकट के समाधान के लिए सरकार द्वारा कोई कदम न उठाये जाने के विरोध में सभी कार्यक्रमों का बाहिष्कार किया. शिक्षक दिवस पर सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार करते हुए शिक्षकों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा. इस विषय में बंगीय प्राथमिक शिक्षक समिति के महासचिव आनंद हांडा ने कहा कि कभी शिक्षा के क्षेत्र में शीर्ष पर रहा बंगाल राज्य अब सबसे निचले पायदान पर है. कई दशकों से पास-फेल की व्यवस्था न होने के कारण शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट और तेज़ हो गयी है. पिछले साल केंद्र सरकार ने पांचवीं और आठवीं कक्षा में पास-फेल की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन इसे आज तक राज्य में लागू नहीं किया गया है. शिक्षा के स्तर में गिरावट के कारण अभिभावक समुदाय का सरकारी शिक्षण संस्थानों से विश्वास उठ गया है. परिणामस्वरूप, स्कूलों में छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आ रही है. इसी बहाने, हजारों स्कूलों को विलय या बंद करने की योजना बनायी जा रही है. यहां तक कि जब राज्य शिक्षा नीति बनायी गयी थी, तब भी शिक्षक समाज की राय को ध्यान में नहीं रखा गया था. शिक्षकों का कहना है कि माध्यमिक में 26 हज़ार और प्राथमिक में 32 हज़ार शिक्षकों की भर्ती में असीमित भ्रष्टाचार आज साबित हो गया है, शिक्षण जैसा महान पेशा कलंकित हो रहा है. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार बकाया 25% डीए नहीं दिया गया है. सरकार एआइसीपीआइ के अनुसार डीए भुगतान के मुद्दे को न्यायालय में लंबित करके समय बर्बाद कर रही है. एक प्रेस विज्ञप्ति में, समिति के महासचिव आनंद हांडा ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने शिक्षकों की भ्रष्ट भर्ती करके शिक्षण जैसे महान पेशे को कलंकित किया है, उन्हें शिक्षकों का सम्मान करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. इससे अच्छे शिक्षकों की भी छवि खराब हो रही है. कॉलेज स्क्वायर में हुई बैठक को समिति के महासचिव आनंद हांडा, पूर्व अध्यक्ष अजीत होर, राज्य सचिव सदस्य समीर बेरा, सतीश साव, सुमिता मुखर्जी, विकास नस्कर, प्रताप पांडा, सौमित्र पटनायक, समरेंद्र मंडल, सेक कुतुबुद्दीन, श्रीमंत धारा और अन्य नेताओं ने संबोधित किया.

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Author: GANESH MAHTO

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