जुल्म के विरुद्ध बिरसा मुंडा का संघर्ष हर पीढ़ी को करेगा प्रेरित : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मुंडा विद्रोह के इस महानायक की 150वीं जयंती राज्यभर में सम्मान और गरिमा के साथ मनायी जा रही है. इस विशेष अवसर पर राज्य सरकार ने शनिवार को सरकारी अवकाश घोषित किया.

कोलकाता.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मुंडा विद्रोह के इस महानायक की 150वीं जयंती राज्यभर में सम्मान और गरिमा के साथ मनायी जा रही है. इस विशेष अवसर पर राज्य सरकार ने शनिवार को सरकारी अवकाश घोषित किया.

उन्होंने कहा कि विदेशी शासन के अन्याय के खिलाफ मुंडा का संघर्ष और बलिदान देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा. उन्होंने एक्स को लिखा : जय जोहार. मुंडा विद्रोह के वीर नेता, आदिवासी समुदाय के महान पूर्वज बिरसा मुंडा की जन्म शताब्दी के अवसर पर मैं उन्हें सादर नमन करती हूं. उन्होंने कहा : इस विशेष दिन को पूरे राज्य में पूरे सम्मान के साथ मनाया जा रहा है. आदिवासी समुदाय की इस जीवन शक्ति का नाम वन क्षेत्र में स्थित हमारे एक विश्वविद्यालय से जुड़ा है. उनके सम्मान में, हमने बंगाल में एक कॉलेज का नाम भी उनके नाम पर रखा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज के इस महान पुरोधा की विरासत इतिहास में अमिट है और राज्य उनके योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण करता रहेगा.

अभिषेक ने भी दी भगवान बिरसा को श्रद्धांजलि :

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बिरसा मुंडा भारत के उन महान नायकों में शामिल हैं, जिन्होंने साहस, बलिदान और अन्याय के खिलाफ अटूट प्रतिरोध की अद्वितीय मिसाल पेश की.बनर्जी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘कम उम्र में ही बिरसा मुंडा ने उत्पीड़न व शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की, अपने लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और ऐसी आंदोलन धारा को जन्म दिया, जिसने देश के इतिहास की दिशा बदल दी. उनका संघर्ष आज भी सम्मान, समानता और आत्मसम्मान की हर लड़ाई को प्रेरणा देता है. सामाजिक सौहार्द, वंचित समुदायों के सशक्तीकरण और जल-जंगल-जमीन की रक्षा को लेकर बिरसा मुंडा की पुकार आज भी उतनी ही प्रासंगिक है. उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को अधिक मानवीय और समावेशी भविष्य की राह दिखाते रहेंगे.’

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Published by: Bijay kumar

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