बंगाल चुनाव 2026: ओवैसी-हुमायूं गठबंधन से सियासी भूचाल, क्या बिगड़ेगा ममता बनर्जी का समीकरण?

Owaisi Humayun Kabir Alliance: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले AIMIM और हुमायूं कबीर की पार्टी के बीच गठबंधन पर बवाल मच गया है. टीएमसी, कांग्रेस और शिवसेना ने ओवैसी पर निशाना साधा है. जानें बंगाल में कैसे बदल सकते हैं चुनावी समीकरण.

Owaisi Humayun Kabir Alliance: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक एक महीने पहले राज्य की राजनीति में एक नया मोर्चा खुल गया है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) ने हाथ मिला लिया है. इस नये गठबंधन के सामने आते ही भाजपा विरोधी दलों ने तीखा हमला बोला है. तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने एक सुर में आरोप लगाया है कि यह गठबंधन सिर्फ ‘धर्मनिरपेक्ष वोटों’ को बांटने और भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है.

मुस्लिम समाज हो सकता है अलग-थलग – सौगत रॉय

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इस गठबंधन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि ओवैसी की पार्टी असल में भाजपा की मदद कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के प्रयासों से मुस्लिम समाज मुख्यधारा से अलग-थलग पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि बंगाल में ओवैसी का कोई आधार नहीं है और जनता उन्हें नकार देगी.

बीजेपी के स्पीड डायल पर ओवैसी – विपक्ष का कड़ा प्रहार

गठबंधन की खबर आते ही भाजपा विरोधी दलों के नेताओं ने ओवैसी को निशाने पर लिया.

  • प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना UBT) : जब भी भाजपा मुश्किल में होती है, वह AIMIM को बुलाती है. ओवैसी भाजपा के ‘स्पीड डायल’ पर रहते हैं.
  • महुआ माजी (JMM) : AIMIM भाजपा की ‘बी-टीम’ है. जहां भी ये चुनाव लड़ते हैं, वहां विपक्ष के वोट कटते हैं और सीधे तौर पर भाजपा को जीत मिलती है.
  • मणिकम टैगोर (कांग्रेस) : कुछ लोगों ने धर्मनिरपेक्ष ताकतों को कमजोर करने की ‘सुपारी’ या ठेका ले रखी है.

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Owaisi Humayun Kabir Alliance: क्या मुस्लिम वोट बैंक में लगेगी सेंध?

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान है. हुमायूं कबीर का मुर्शिदाबाद और आसपास के इलाकों में अच्छा प्रभाव माना जाता है. असदुद्दीन ओवैसी के साथ उनका मिलना टीएमसी के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि पिछले चुनावों में मुस्लिम समुदाय ने एकतरफा ममता बनर्जी का समर्थन किया था.

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By Mithilesh Jha

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