कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट
Operation Pushback: भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध प्रवासियों और कथित घुसपैठियों को लेकर स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है. एक तरफ पश्चिम बंगाल सरकार ‘ऑपरेशन पुशबैक’ और ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ अभियान के तहत अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया तेज कर रही है, वहीं दूसरी ओर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) कई मामलों में उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर रहा है. इसका नतीजा यह हो रहा है कि दर्जनों लोग दोनों देशों के बीच स्थित नो-मैन्स लैंड व जीरो प्वाइंट में फंस जा रहे हैं.
न इधर के और न उधर के
बीजीबी के रवैये के कारण ऐसे लोगों की हालत यह है कि वे बांग्लादेश वापस नहीं लौट पा रहे हैं और अब न इधर के और न उधर के हैं. राज्य में ऑपरेशन पुशबैक मुख्य रूप से उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना मालदा, मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, नदिया, जलपाईगुड़ी और दक्षिण दिनाजपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में चलाया जा रहा है.
सुंदरबन सीमा पर 20 घुसपैठिये फंसे
बताया जा रहा है कि आठ से 10 जून के बीच बीएसएफ ने करीब 20 घुसपैठियों को नदी मार्ग और अन्य सीमावर्ती रास्तों से बांग्लादेश पुशबैक किया था. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों की माने, तो बांग्लादेश के सतखीरा जिले के नीलडुमुर क्षेत्र में बीजीबी ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती, रात्रि गश्त और हाई स्पीड बोट के जरिये निगरानी के जरिये उन घुसपैठियों को रोक दिया. वे फिलहाल नो-मैन्स लैंड में ही हैं. यानी वे बांग्लादेश में वापस नहीं लौट पा रहे हैं.
सीमा पर कड़ी निगरानी
बीजीबी की 17वीं बटालियन के कमांडिंग अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल शाहारियार ने कहा कि बिना सत्यापन किसी भी व्यक्ति को बांग्लादेशी क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी भी कथित पुशबैक को रोका जायेगा. वहीं, बीएसएफ की ओर से भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बल की ओर से आदेशों व कर्तव्यों का निर्वहन हर हाल में जारी रहेगा. घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.
फंसे लोगों के प्रति बीएसएफ ने दिखायी मानवता
जलपाईगुड़ी के बेरुबाड़ी सीमा क्षेत्र में बीएसएफ की ओर से मानवता की एक घटना भी देखी गयी. यहां 10 बांग्लादेशी नागरिक, जिनमें दो बच्चे शामिल थे, तीन दिनों तक नो-मैन्स लैंड में फंसे रहे. बताया गया कि ये लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे थे और वापस अपने देश लौटने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन बीजीबी ने उन्हें स्वीकार नहीं किया और कथित रूप से वापस जीरो प्वाइंट पर छोड़ दिया. खुले आसमान के नीचे तीन दिन बिताने के बाद इन लोगों को बीएसएफ ने मानवीय आधार पर उन्हें सुरक्षित निकालकर जलपाईगुड़ी कोतवाली थाना पुलिस के हवाले कर दिया. फिलहाल उन्हें होल्डिंग सेंटर में रखा गया है. बीएसएफ अब फ्लैग मीटिंग के जरिये इस मामले का समाधान निकालने की कोशिश कर रही है.
होल्डिग सेंटरों में 400 से ज्यादा लोग
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के विभिन्न होल्डिंग सेंटरों में अभी भी 400 से ज्यादा लोगों को रखा गया है. कुछ दिनों पहले यह संख्या 386 थी. इनमें सबसे अधिक 335 से ज्यादा लोग उत्तर 24 परगना के होल्डिंग सेंटरों में हैं. इसके अलावा मुर्शिदाबाद में 19, मालदा में नौ, दक्षिण दिनाजपुर में आठ तथा अन्य सीमावर्ती जिलों में भी लोगों को रखा गया है. इनमें पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. राज्य में होल्डिंग सेंटर की संख्या 11 है.
किस जिले में कहां होल्डिंग सेंटर
बशीरहाट पुलिस जिले में तेंतुलिया पाथेरसाठी, चारघाट फ्लड सेंटर और मेदिया सुभाषनगर फ्लड सेंटर स्थापित हैं, जबकि बारुईपुर पुलिस जिले में कर्मतीर्थ, सुंदरबन पुलिस जिले के लक्खीकांतपुर कम्युनिटी हॉल, दक्षिण दिनाजपुर के रामपुर कर्मतीर्थ, बनगांव पुलिस जिले के मंदर एंड चाइल्ड होम, बारासात पुलिस जिले के देगंगा, कूचबिहार के दिनहाटा के आपोनघर, मुर्शिदाबाद के भगवानगोला स्थित स्वप्न नगर मार्केट कॉम्प्लेक्स, जंगीपुर के लालगोला, कृष्णनगर के भीमपुर और मालदा के कर्मतीर्थ में होल्डिंग सेंटरों में घुसपैठियों को रखा गया है.
बीएसएफ-बीजीबी जवानों के बीच हो चुकी है बहस
पुशबैक को लेकर बीएसएफ व बीजीबी के जवानों के बीच हो बहस की घटनाएं भी हो चुकी है. साउथ वेस्ट गारो हिल्स में नंदिरचर के भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में भी तनाव की स्थिति देखी गयी थी. एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस भेजने के दौरान बीजीबी द्वारा उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया. इस मुद्दे पर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा बलों के बीच तीखी बहस होने की खबरें सामने आयी थी.
बीजीबी का विरोध, भारत का सख्त रुख
बांग्लादेश सरकार लगातार इन पुशबैक घटनाओं का विरोध कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में भारत को 12 से 13 पत्र भेजे जाने की जानकारी दी है. बीजीबी ने स्पष्ट कहा है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा प्रबंधन के सिद्धांतों और द्विपक्षीय समझौतों के खिलाफ होने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध किया जायेगा.
भारतीय कानून के तहत कार्रवाई
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत में अवैध रूप से रहने वाले किसी भी विदेशी नागरिक के खिलाफ भारतीय कानून के तहत कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नो-मैन्स लैंड में फंसे लोगों के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है.
556 किलोमीटर सीमा अब भी बिना बाड़ की
पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है. राज्य सरकार के अनुसार इनमें से करीब 556 किलोमीटर सीमा अब भी बिना बाड़ वाली है. यही वजह है कि घुसपैठ, तस्करी और अवैध आवाजाही को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के सामने लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं.
कूटनीतिक संबंधों पर भी असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि तीस्ता जल बंटवारा, गंगा जल संधि और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत के बीच सीमा पर बढ़ती पुशबैक घटनाएं दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं. पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क बढ़े हैं, लेकिन सीमा पर पैदा हो रही ये परिस्थितियां नयी चुनौती बनकर सामने आयी हैं.
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सीमा पर हाई अलर्ट के मोड में दोनों देशों के बल
फिलहाल सीमा के दोनों ओर सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं. सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जो न तो भारत में स्वीकार किये जा रहे हैं और न ही बांग्लादेश में. ऐसे लोगों की स्थिति नो-मैन्स लैंड में फंसे मानव समूह की तरह हो गयी है, जो सीमा विवाद के बीच मानवीय संकट का प्रतीक बनते जा रहे हैं.
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