मतदाता सूची में फर्जी अल्पसंख्यक वोटरों के नाम

मालदा जिले के गाजोल के एक गांव में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

भाजपा विधायक ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियाें के नाम मतदाता सूची में शामिल करने का लगाया आरोप

संवाददाता, कोलकाता.

मालदा जिले के गाजोल के एक गांव में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिये हैं. जहां इलाके में एक भी अल्पसंख्यक व्यक्ति नहीं रहता, वहां दो अपरिचित और कथित अल्पसंख्यक वोटरों के नाम नये मतदाता सूची में शामिल पाये गये हैं. इसे लेकर भाजपा विधायक चिन्मय देव बर्मन ने अवैध घुसपैठ और फर्जी वोटर जोड़ने का आरोप लगाया है.

भाजपा विधायक का आरोप है कि अवैध घुसपैठियों को शरण देकर उन्हें वोटर लिस्ट में शामिल किया जा रहा है, जिससे चुनावी गड़बड़ी की आशंका बढ़ गयी है. हाल ही में गाजोल 2 नंबर ग्राम पंचायत के घाकसोल इलाके का दौरा करने गयीं पंचायत प्रमुख उर्मिला राजबंशी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वोटर लिस्ट में दो ऐसे नाम हैं, जिनसे न तो वे और न ही गांव के लोग जानते हैं.

स्थानीय लोगों ने भी पंचायत प्रधान को बताया कि वे दो व्यक्ति इस इलाके में कभी नहीं देखे गये और न ही उनका कोई स्थानीय निवास है. इस पर उर्मिला राजबंशी ने तुरंत जिला प्रशासन और चुनाव आयोग को इसकी जानकारी दी और जांच की मांग की. उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले गाजोल क्षेत्र से चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि वे और उनके कुछ साथी इस इलाके में आकर अवैध रूप से बसने की कोशिश कर रहे थे. यह संदेह अब और गहराता जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें मतदाता सूची में भी जोड़ा जा रहा है.

बीएलओ (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) स्नेहाशीष टुडू ने भी शिकायत की पुष्टि करते हुए कहा कि हमें शिकायत मिली है, और हमने प्रशासन को जानकारी दे दी है. जिन दो अज्ञात नामों की बात हो रही है, उन्हें वोटर लिस्ट से जल्द हटाया जाएगा. संभवतः डाटा एंट्री के दौरान ऑनलाइन गड़बड़ी हुई होगी.

वहीं, इस मामले में तृणमूल कांग्रेस की ओर से मालदा जिला उपाध्यक्ष शुभमय बोस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि बिहार में भाजपा ने जैसा किया, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. दिल्ली चुनाव में भी उन्होंने वोटर लिस्ट में हेराफेरी कर जीत हासिल की थी. अब वही खेल बंगाल में दोहराना चाहते हैं. फिलहाल, प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और विवादित नामों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

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