कोलकाता में ‘उत्तरन’ के विकास पर नगर निगम का फोकस

उन्होंने ने बताया कि इसके पहले शहर की सभी बस्तियों की सड़कों पर पेवर ब्लॉक लगाये गये थे, जिससे बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती.

कोलकाता. महानगर की बस्तियों का नाम बदलकर अब ‘उत्तरन’ कर दिया गया है. इसके साथ ही कोलकाता नगर निगम इन ‘उत्तरन’ क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर दे रहा है. बस्तियों में पेयजल आपूर्ति, शौचालय, लाइटिंग और सड़कों की मरम्मत से संबंधित कार्य तेज गति से चल रहे हैं. यह जानकारी निगम के उत्तरन विभाग के मेयर-परिषद सदस्य सपन समद्दार ने दी. उन्होंने ने बताया कि इसके पहले शहर की सभी बस्तियों की सड़कों पर पेवर ब्लॉक लगाये गये थे, जिससे बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती. उन्होंने कहा कि कोलकाता में कुल 3334 बस्तियां हैं. अब इन बस्तियों में शौचालयों की मरम्मत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके तहत बस्तियों के शौचालयों में पहले ही टॉली लगायी जा चुकी है और अब फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर (एफआरपी) के दरवाजे लगाये जा रहे हैं, जो अधिक टिकाऊ माने जाते हैं. उन्होंने बताया कि नाम परिवर्तन के बाद से ही निगम बस्तियों के विकास कार्यों पर व्यापक रूप से काम कर रहा है. बस्तियों में फैले तारों के मकड़जाल को भी दूर किया जा रहा है. समद्दार ने कहा कि निगम का लक्ष्य सभी ‘उतरन’ क्षेत्रों को मॉडल बस्ती के रूप में विकसित करना है. फिलहाल 15 बस्तियों को मॉडल उतरन का स्वरूप दिया जा चुका है. उनका दावा है कि बस्तियों के विकास को लेकर अब कहीं से कोई बड़ी शिकायत नहीं मिल रही है. समद्दार ने कहा कि वाम मोर्चा शासन के दौरान इन बस्तियों की हालत काफी दयनीय थी, जबकि अब स्थितियों में तेज सुधार हुआ है.

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Author: GANESH MAHTO

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