250 से अधिक कर्मचारी लगाये गये हैं बीएलओ के कामकाज में

कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के करीब 250 से अधिक कर्मचारी इस प्रक्रिया में शामिल किये गये हैं.

कोलकाता. देश के अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी मंगलवार से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआइआर) फॉर्म वितरण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. इस कार्य के लिए सरकारी कर्मचारियों को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के रूप में नियुक्त किया गया है. कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के करीब 250 से अधिक कर्मचारी इस प्रक्रिया में शामिल किये गये हैं. डेढ़ से दो महीने तक इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारी चुनाव आयोग के इस कार्य में व्यस्त रहेंगे, जिससे निगम के नियमित कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जतायी जा रही है. निगम सूत्रों के अनुसार, नगर निगम में पहले से ही हजारों स्थायी पद रिक्त हैं. फिलहाल कार्य संचालन अस्थायी और संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है. मौजूदा कर्मचारियों पर पहले ही भारी काम का बोझ है. ऐसे में बीएलओ ड्यूटी पर जाने से विभागीय कार्यों में बाधा आना तय माना जा रहा है. बीएलओ के रूप में नियुक्त कर्मचारियों को घर-घर जाकर एसआइआर फॉर्म वितरित करने और नागरिकों से आवेदन भरवाने का दायित्व दिया गया है. इस प्रक्रिया में काफी समय लगने की संभावना है. निगम का कहना है कि लंबे समय तक कर्मचारियों की अनुपलब्धता से नागरिक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. इसलिए इस संबंध में चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत भी की गयी है. निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “कर्मचारियों को एसआइआर से संबंधित कामों के साथ-साथ नगर निगम के नियमित कार्य भी करने पड़ रहे हैं. लेकिन एक व्यक्ति के लिए लंबे समय तक दोनों जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है. अगर वे आयोग का काम करेंगे, तो निगम की सेवाएं प्रभावित होंगी.” वर्तमान में निगम के कई विभागों-जैसे कर निर्धारण, भवन, सड़क, बस्ती, लाइटिंग और शिक्षा में भारी रिक्तियां हैं. कुछ विभागों में एक कर्मचारी को तीन से चार वार्डों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है. कई अधिकारी एक से अधिक जोन या नगर निगमों के प्रभारी हैं. ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि अगर वे एसआइआर कार्य में व्यस्त रहेंगे, तो नागरिक सेवाओं का सामान्य संचालन एक बड़ी चुनौती बन जायेगा.

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By GANESH MAHTO

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