अखिल भारतीय मतुआ महासंघ के नाम से ही आयोजित करना होगा मतुआ मेला

कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक और न्यायमूर्ति शब्बार रशीदी की खंडपीठ ने शुक्रवार को मतुआ मेले के अधिकार के संबंध में एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा

संवाददाता, कोलकाता.

कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक और न्यायमूर्ति शब्बार रशीदी की खंडपीठ ने शुक्रवार को मतुआ मेले के अधिकार के संबंध में एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा. खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह मेला अखिल भारतीय मतुआ संघ के नाम से ही आयोजित करना होगा. हालांकि, मतुआ मेला के आयोजन का अधिकार किसके पास होगा, यह प्रश्न निचली अदालत में लंबित है. इसका निर्णय निचली अदालत करेगी. अदालत ने दोनों पक्षों को शांति व व्यवस्था बनाये रखते हुए मेला आयोजित करने का आदेश दिया. गौरतलब है कि श्री हरिचंद ठाकुर की 214वीं जयंती के अवसर पर उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में यह मेला शुरू हो गया है.

लाखों मतुआ भक्त ठाकुरनगर के ठाकुरबाड़ी स्थित कामना सागर में पवित्र स्नान करते हैं. यह मेला सात दिनों तक चलेगा. इस वर्ष मेले का संचालन कौन करेगा, इसे लेकर ममता बाला ठाकुर और शांतनु ठाकुर के बीच रस्साकशी शुरू हो गयी थी और यह मामला हाइकोर्ट तक पहुंचा था. इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की पीठ ने जिला परिषद को नियमों के अनुसार अनुमति देने को कहा था. इसके बाद मतुआ मेले के आयोजन की जिम्मेदारी ममता ठाकुर को दी गयी. मेला आयोजित किया गया. हालांकि, इस फैसले को चुनौती देते हुए केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने खंडपीठ में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया.

हाइकोर्ट ने दोनों पक्षों को मेले को शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने के लिए कहा है. अदालत ने प्रशासन को कड़ी निगरानी रखने का आदेश दिया है, ताकि आने वाले दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

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