कोलकाता से बिकास कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
सियालदह पॉक्सो अदालत ने एक नाबालिग किशोरी के साथ जबरन शादी करने और उसके बाद यौन शोषण करने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पति को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. सरकारी वकीलों का दावा है कि इस तरह के मामले में कड़ी सजा मिलने का यह अपने आप में पहला अनूठा उदाहरण है.
दिसंबर में आरोपित हुआ था गिरफ्तार
यह सनसनीखेज मामला तब प्रकाश में आया जब गर्भवती होने पर उस नाबालिग को एक बच्चे को जन्म देने के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत वर्ष दिसंबर में उत्तर कोलकाता के चितपुर थाने की पुलिस ने अमित प्रमाणिक नामक एक युवक को गिरफ्तार किया था.
पिछले साल अगवा कर की थी शादी
पुलिस और अदालत के सूत्रों के मुताबिक, चितपुर निवासी 30 वर्षीय अमित प्रमाणिक ने पिछले साल एक नाबालिग लड़की का अपहरण किया और उसके साथ भाग गया था. इसके बाद उसने जबरन उससे विवाह किया और उसे अपने घर ले आया, जहां उसके परिवार ने नयी बहू को अपना लिया था. कुछ समय बाद लड़की गर्भवती हो गयी और प्रसव के लिए उसे आरजी कर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया.
अस्पताल में जांच के दौरान खुला राज
बच्चे के जन्म के समय जब उसके पहचान दस्तावेजों की जांच की गयी, तब यह खुलासा हुआ कि नवजात शिशु की मां नाबालिग है. इस खुलासे के बाद अस्पताल के अधिकारियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी और चितपुर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज करायी गयी. इसके आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नाबालिग के पति अमित प्रमाणिक को गिरफ्तार कर लिया था.
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20 साल की जेल और 10 हजार का जुर्माना
सरकारी वकील असीम कुमार ने बताया कि जज ने पॉक्सो एक्ट के तहत अमित प्रमाणिक को 20 साल की जेल और 10 हजार का जुर्माना (जुर्माना न भरने पर एक साल की अतिरिक्त जेल) और बाल विवाह कानून के तहत एक साल की जेल की सजा सुनायी है. संबंधित अधिकारियों को नाबालिग लड़की को दो लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है.
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