पश्चिम बंगाल में लगातार 15 साल तक शासन करने वाली ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और सांगठनिक नियंत्रण को लेकर छिड़ी जंग जारी है. इस बीच पार्टी की संस्थापक और बंगाल की पूर्व चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के सचिव अश्विनी कुमार मोहाल को एक पत्र लिखा है. इसमें ममता बनर्जी ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर चल रही जांच प्रक्रिया तेज करने की मांग की है. उन्होंने आयोग से आग्रह किया है कि बागी (प्रतिद्वंद्वी) गुट को अपना जवाब दाखिल करने के लिए अब और समय न दिया जाये.
ममता गुट ने समय पर आयोग को भेजा था अपना जवाब
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में टाइमलाइन के साथ आयोग को याद दिलाया है कि 2 जुलाई के निर्देश के बाद उनके गुट ने तय समयसीमा (6 जुलाई) के भीतर ही अपना विस्तृत जवाब आयोग को सौंप दिया था. इसके विपरीत, प्रतिद्वंद्वी गुट (रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े) ने बार-बार समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया. आयोग ने पहले इसे 10 जुलाई और फिर 15 दिन का अतिरिक्त समय देते हुए अंतिम समयसीमा 25 जुलाई तय की थी.
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25 जुलाई के बाद कोई जानकारी नहीं
तृणमूल प्रमुख ने आयोग को लिखे अपने पत्र में कहा है कि 25 जुलाई की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी आयोग द्वारा उन्हें यह जानकारी नहीं दी गयी है कि बागी गुट ने अपना जवाब दाखिल किया है या नहीं. न ही उन्हें किसी उत्तर की प्रति दी गयी है. ममता ने कहा कि इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि बागी धड़ा निर्धारित समयसीमा में अपना जवाब दाखिल करने में विफल रहा. इसलिए अब उन्हें और अवसर देना अनुचित होगा.
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पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पड़ रहा असर : ममता
ममता बनर्जी ने आयोग को सचेत करते हुए कहा कि इस मामले के पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गंभीर और दूरगामी प्रभाव पड़ रहे हैं. उन्होंने लिखा कि न्याय प्रक्रिया में विश्वास बना रहना बेहद आवश्यक है, और यदि 25 जुलाई के बाद भी बागी धड़े को कोई और मौका दिया गया, तो आयोग की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा डगमगा सकता है. उन्होंने चुनाव आयोग से मामले की जांच तुरंत समाप्त कर अंतिम निर्णय देने की अपील की है.
