ममता बनर्जी की टीएमसी से बगावत करने वाले 20 सांसदों को नोटिस के बाद विधायकों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी

Bengal TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत का दौर जारी है. 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर होने के बाद, अब पार्टी का नेतृत्व राज्य के बागी विधायकों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' करने की तैयारी कर रहा है. देखें क्या है आगे की रणनीति.

Bengal TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक घमासान अभी भी थमा नहीं है. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस बागियों को सबक सिखाने के लिए आक्रामक मोड में है. 15 साल तक पश्चिम बंगाल में सरकार चलाने वाली पार्टी की चुनावी हार के बाद 20 सांसद बागी हो गये थे. इन बागी सांसदों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और लोकसभा अध्यक्ष की अदालत में अयोग्यता (Disqualification) याचिका दायर होने के बाद ममता बनर्जी गुट अब बागी विधायकों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की रणनीति बना रहा है.

लोकसभा सचिवालय से बागी सांसदों को नोटिस

यह घटनाक्रम लोकसभा सचिवालय द्वारा तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को अयोग्यता याचिकाओं पर एक सप्ताह के भीतर अपनी सफाई और टिप्पणियां प्रस्तुत करने के संबंध में जारी किये गये कारण बताओ नोटिस के ठीक बाद सामने आया है.

अभी इंतजार कीजिए. आने वाले कुछ महीनों में कई बड़े राजनीतिक बदलाव होंगे. खेल तो अभी बस शुरू हुआ है. -कल्याण बनर्जी, वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल सांसद

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल : तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प, एक की मौत, कई घायल

विधायकों के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी

ममता बनर्जी खेमे के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने दावा किया है कि संसद में बागी सांसदों पर कार्रवाई पूरी होते ही पश्चिम बंगाल के बागी टीएमसी विधायकों के खिलाफ अगला कदम उठाया जायेगा. ममता बनर्जी गुट के सूत्रों का दावा है कि कई बागी विधायक पहले से ही पार्टी के संपर्क में हैं. वे जल्द घर वापसी कर सकते हैं. जो पार्टी में नहीं लौटेंगे, उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है.

संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत स्पीकर कार्यालय द्वारा 2 महीने बाद यह कार्रवाई एक बड़ा मोड़ है. 20 विश्वासघातियों को तुरंत अयोग्य ठहराया जाना चाहिए. -सागरिका घोष, राज्यसभा सांसद, तृणमूल कांग्रेस

ये भी पढ़ें: आसान नहीं तृणमूल सांसदों का दलबदल! सांसदों की बगावत में बाधा बनेगा कानून

20 बागी सांसदों को लोकसभा सचिवालय का नोटिस

ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी (All India Trinamool Congress) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए लोकसभा सचिवालय ने 25 अगस्त को 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है. दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत सांसदों से ‘संसदीय दलबदल (अयोग्यता) नियम, 1985’ के नियम 7(3) के तहत 7 दिन के भीतर स्पष्टीकरण और जवाब देने को कहा गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध सुनवाई का दिया निर्देश

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने स्पीकर के समक्ष लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से विचार करने के आदेश दिये हैं.

ये भी पढ़ें: बंगाल में ‘40 करोड़’ वाला ब्लास्ट! महुआ मोईत्रा पर भड़कीं शताब्दी रॉय, दी कोर्ट में घसीटने की धमकी

बागी सांसदों का दावा- हमारा पक्ष मजबूत

नेशनलिस्ट सिटीजेंस पार्टी ऑफ इंडिया (Nationalist Citizens Party of India- NCPI) में शामिल होने वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने दावा किया है कि उनका पक्ष मजबूत है. बांग्ला फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री और बागी गुट की प्रमुख सांसद शताब्दी रॉय ने कहा- कानून की व्याख्या कई तरीकों से की जा सकती है. हमारे पास अलग होने के लिए आवश्यक दो-तिहाई (2/3) से अधिक बहुमत है. हम समय सीमा के भीतर अपना विस्तृत जवाब स्पीकर के समक्ष दाखिल करेंगे.

ये भी पढ़ें: क्या चल रहा है TMC में? घर वापसी करेंगे बागी सांसद या फिर टूटेगी ममता बनर्जी की पार्टी?


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबा अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं.

अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है.

वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं.

भौगोलिक विशेषज्ञता : वर्तमान में उनका फोकस पश्चिम बंगाल है. उन्होंने झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की खबरों पर भी काम किया है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है.

मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :-

राज्य की राजनीति और शासन : वर्पतमान में श्चिम बंगाल की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज.

सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग.

जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित रिपोर्टिंग.

डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है.

विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर पत्रकारिता, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव और तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >