खनन परियोजनाओं में आदिवासियों के हितों की रक्षा करने में नाकाम रही ममता बनर्जी सरकार : CAG रिपोर्ट

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने पश्चिम बंगाल सरकार की एक विफलता को उजागर किया है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान आदिवासियों को न तो पर्याप्त मुआवजा मिला और न ही उनके अधिकारों की रक्षा हुई. यह स्थिति ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में देखी गयी. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान आदिवासियों के अधिकारों और हितों की रक्षा करने में पश्चिम बंगाल सरकार की ‘विफलता’ को उजागर किया है. कैग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच के 5 वित्तीय वर्षों (ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार में) के दौरान राज्य में आदिवासी भूमि मालिकों को उनकी जमीनों का पर्याप्त और उचित मुआवजा नहीं दिया गया.

कैग की रिपोर्ट की प्रमुख बातें

  • खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में पश्चिम बंगाल सरकार आदिवासियों को उचित मुआवजा दिलाने में विफल रही.
  • 17.79 करोड़ रुपए के बाजार मूल्य के मुकाबले आदिवासियों को सिर्फ 2.55 करोड़ रुपए मिले.
  • राजस्व अधिकारियों और जिलाधिकारियों की निष्क्रियता की वजह से पुनर्वास कार्यों में रुकावट आयी.
  • 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले 100 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा नहीं मिला. इससे आदिवासियों को 17.80 करोड़ रुपए का अतिरिक्त नुकसान हुआ.

राजस्व और जिला प्रशासन की निष्क्रियता

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन और अधिग्रहण के ऑडिट के दौरान राजस्व अधिकारियों, जिलाधिकारियों (DM) तथा अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों की निष्क्रियता और भागीदारी का अभाव देखा गया. प्रशासनिक अधिकारियों की इस अनदेखी के कारण पुनर्वास और पुनर्स्थापना से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों पर बेहद बुरा असर पड़ा.

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ईसीएल और बीसीसीएल के 66 मामलों की जांच

इस विशेष ऑडिट के दौरान वित्त वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच भूमि अधिग्रहण के कुल 66 मामलों की गहन जांच की गयी. इन मामलों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के सालानपुर, श्रीपुर, कुनुस्तोरिया और परबेलिया क्षेत्र तथा भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) का बराकर इलाका शामिल था.

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बाजार मूल्य से 85.68 फीसदी कम किया भुगतान

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिग्रहीत जमीनों का अनुमानित बाजार मूल्य 17.79 करोड़ रुपए था. इसके विपरीत ईसीएल (ECL) और बीसीसीएल (BCCL) ने बातचीत के जरिये जमीन खरीदने के नाम पर आदिवासी भू-स्वामियों को महज 2.55 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया. इस प्रकार, आदिवासियों को बाजार मूल्य की तुलना में 85.68 प्रतिशत यानी 15.25 करोड़ रुपए कम मिले.

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कानूनी हक और अतिरिक्त मुआवजे से भी वंचित रहे आदिवासी

रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि कंपनियां ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ (RFCTLARR Act, 2013) के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहीं.

  • कानून के तहत अनिवार्य 100 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे (Solatium) का भुगतान नहीं किया गया. इससे आदिवासी 17.80 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि से वंचित रह गये.
  • जांचे गये किसी भी मामले में बाजार मूल्य पर सालाना 12 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज/मुआवजा नहीं दिया गया.
  • रिपोर्ट में ईसीएल (ECL) द्वारा जमीन की कीमतों के भुगतान में भारी विसंगतियों और असमानता को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है.

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By मिथिलेश झा

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