मुंगेर से असलहे लाता था लिटन, मरम्मत में भी था माहिर

मधुसूदन मुखर्जी उर्फ लिटन लंबे समय से पुलिस की नजर से बचकर अवैध हथियारों के कारोबार में सक्रिय था.

खड़दह से हथियारों की बरामदगी का मामला

आरामदेह अपार्टमेंट में छिपा रखा था अवैध हथियारों का जखीरा, पूछताछ में हुए कई खुलासे

प्रतिनिधि, बैरकपुर.

खड़दह के रिजेंट पार्क स्थित एक अपार्टमेंट से भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद होने के मामले में गिरफ्तार मधुसूदन मुखर्जी उर्फ लिटन लंबे समय से पुलिस की नजर से बचकर अवैध हथियारों के कारोबार में सक्रिय था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह न सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त करता था, बल्कि उ0नकी मरम्मत में भी माहिर था. पूछताछ में लिटन ने स्वीकार किया है कि वह वर्षों से इस अवैध गतिविधि से जुड़ा था और मोटी रकम लेकर राइफल या पिस्टल की मरम्मत करता था. बताया गया है कि कई लोग गुपचुप तरीके से उससे हथियार ठीक कराने आते थे.

कुछ दिन पहले बिहार के मुंगेर से एक व्यक्ति को अवैध हथियारों के व्यापार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उसकी निशानदेही पर ही लिटन का नाम सामने आया. इसके बाद बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट की खुफिया शाखा ने सोमवार को खड़दह स्थित उसके फ्लैट पर छापा मारा, जहां से 15 आग्नेयास्त्र और 1,000 राउंड कारतूस बरामद किये गये. जांच में सामने आया है कि लिटन मुंगेर के एक हथियार विक्रेता से नियमित रूप से कारतूस खरीदता था और उन्हें ऊंचे दाम पर बेचता था. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि हथियार खरीदने कौन-कौन आता था और लिटन के संपर्क में कौन लोग थे. उसका नेटवर्क कितना बड़ा था, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.

लिटन, जिसकी उम्र 66 वर्ष है, मूल रूप से पानीहाटी का रहने वाला है और 2006 में आर्म्स एक्ट के तहत उसे एक बार पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है. वर्ष 2020 में उसने खड़दह के रिहायशी इलाके में फ्लैट खरीदा था, जहां से अब हथियार बरामद किये गये हैं. पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि वह एक जगह ज्यादा समय तक नहीं टिकता था और हथियारों की डिलीवरी स्कूटर की सीट के नीचे छिपाकर करता था. स्थानीय लोगों ने बताया कि उसके घर पर कुछ महिलाओं का आना-जाना भी देखा गया था, जिन्हें वह घरेलू सहायिका बताता था. पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या वे महिलाएं भी किसी तरह से इस अवैध धंधे से जुड़ी थीं.

पूछताछ के दौरान लिटन ने दावा किया कि वह यह कारोबार जल्द ही छोड़ने वाला था, लेकिन पुलिस के जाल में फंस गया. अब जांचकर्ता यह जानने में जुटे हैं कि वह इतने वर्षों तक कैसे बचता रहा और उसके खिलाफ पहले की कार्रवाई के बावजूद उसका नेटवर्क फिर से कैसे सक्रिय हो गया.

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