कुणाल घोष ने कसा तंज, कहा : किसी परीक्षार्थी को परेशान नहीं किया गया

एसएससी परीक्षा. उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा सहित भाजपा शासित कई राज्यों से भी बड़ी संख्या में एक्जाम देने पश्चिम बंगाल पहुंचे उम्मीदवार

एसएससी परीक्षा. उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा सहित भाजपा शासित कई राज्यों से भी बड़ी संख्या में एक्जाम देने पश्चिम बंगाल पहुंचे उम्मीदवार बिहार व झारखंड से भी आये युवाओं ने दी परीक्षा कोलकाता. पश्चिम बंगाल में रविवार को हुई एसएससी परीक्षा ने एक नया राजनीतिक विमर्श छेड़ दिया. राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि नौकरी की तलाश और सरकारी परीक्षाओं की कमी ने भाजपा शासित राज्यों के युवाओं को मजबूर कर दिया कि वे बंगाल आकर परीक्षा दें. आसनसोल सहित कई केंद्रों पर बंगाल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा और झारखंड के उम्मीदवार भी नजर आये. गाजियाबाद, प्रयागराज और देवघर से आये परीक्षार्थियों ने कहा कि अपने राज्य में न तो नियमित परीक्षाएं हो रही हैं और न ही नियुक्तियां, इसलिए उन्हें बंगाल पर भरोसा करना पड़ा. एक महिला परीक्षार्थी तो अपने आठ महीने के बच्चे को गोद में लेकर परीक्षा देने पहुंची. सभी का लक्ष्य एक ही था-सरकारी नौकरी पाना. यूपी से आये उम्मीदवार संदीप कुमार यादव ने कहा, “हमारे राज्य में परीक्षा नहीं होती और नौकरी भी नहीं है, इसलिए बंगाल आना पड़ा.” हाल ही में भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी मजदूरों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले सुर्खियों में रहे थे. ऐसे में बंगाल में परीक्षा देने पहुंचे युवाओं के बयान भाजपा के उस दावे से उलट दिखे, जिसमें कहा गया था कि रोजगार की कमी के कारण बंगाल के लोग बाहर काम करने जाते हैं. तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “बंगाल में परीक्षा देने के लिए यूपी सहित अन्य भाजपा शासित राज्यों से भी परीक्षार्थी आये. यहां किसी को परेशान नहीं किया गया, किसी का अपमान नहीं हुआ और न ही कोई बाधा डाली गयी. समझ गये? जय बंगाल.” उधर, इस मुद्दे पर भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है.

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Published by: Sandip tiwari

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