Kolkata Bus Fare Controversy: कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में निजी बस सेवाएं जल्द ही पूरी तरह ठप हो सकती हैं. ज्वॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट्स (Joint Council of Bus Syndicates) ने पुलिस और मोटर वाहन विभाग (Motor Vehicles Department) की कड़ाई और भारी जुर्माने के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है. बस मालिकों का कहना है कि सरकार द्वारा लंबे समय से बस किराये में बढ़ोतरी न करने और भारी-भरकम जुर्माना लगाने की वजह से इस कारोबार को बचाना नामुमकिन हो गया है.
विवाद की मुख्य वजहें और प्रशासन की सफाई
- 10,000 रुपए का जुर्माना : सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी ने बताया कि मोटर वाहन प्रशासन 10 रुपए न्यूनतम किराया वसूलने वाली बसों पर प्रति बस 10,000 से 15,000 रुपए तक का भारी-भरकम जुर्माना लगा रहा है.
- 9 साल से नहीं बढ़ा किराया : बस मालिकों का कहना है कि पिछले 9 सालों से बस किराये में कोई संशोधन नहीं हुआ है. इस बीच डीजल और मेंटेनेंस के खर्च कई गुना बढ़ चुके हैं.
- मुख्यमंत्री और मंत्री को पत्र : सिंडिकेट ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने, जुर्माना वसूली रोकने और नया किराया चार्ट जारी करने की मांग की है.
- प्रशासन का पक्ष : परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि यात्रियों से मिल रही शिकायतों के आधार पर यह कानूनी कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि सरकार ने अब तक 10 रुपए के न्यूनतम किराये को आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है.
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अगले सप्ताह से सड़कों पर उतरने की चेतावनी
कोलकाता शहर में लगभग 1,500 बसों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस शीर्ष निकाय ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो अगले सप्ताह से सभी निजी बस संगठन और चालक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे.
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