कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट
बारुईपुर में नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद उठे जनाक्रोश और राजनीतिक विवाद के बीच कोलकाता पुलिस ने जीरो एफआइआर के पंजीकरण और हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर नयी और सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है. पुलिस आयुक्त की ओर से रविवार को जारी आदेश का उद्देश्य जीरो एफआइआर के मामलों में होने वाली प्रशासनिक देरी और लापरवाही को रोकना है.
जीरो एफआइआर के प्रति सख्त
आदेश में कहा गया है कि कोलकाता पुलिस और आसपास के जिलों के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों में जीरो एफआइआर दर्ज होने के बाद नियमित एफआइआर में बदलने और संबंधित थाने को मामला हस्तांतरित करने में कई बार अनावश्यक देरी देखी गयी है. कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब जीरो एफआइआर को केवल औपचारिक प्रक्रिया मानकर नहीं छोड़ा जायेगा. इसे दूर करने के लिए सभी थानों को पांच अनिवार्य निर्देश जारी किये गये हैं.
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क्या हैं पांच निर्देश
पहला निर्देश : जिस थाना प्रभारी के स्तर पर जीरो एफआइआर दर्ज की गयी है, उन्हें स्वयं संबंधित थाना प्रभारी से संपर्क कर मामले का तत्काल और सुचारु हस्तांतरण सुनिश्चित करना होगा.
दूसरा निर्देश: मामला स्थानांतरित करने वाला अधिकारी शिकायतकर्ता का संपर्क विवरण और मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी प्राप्तकर्ता थाना प्रभारी को उपलब्ध करायेगा.
तीसरा निर्देश: शिकायतकर्ता या पीड़ित परिवार को मामले की प्रगति से अवगत कराना अनिवार्य होगा. पुलिस को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई की जा रही है.
चौथा निर्देश : जिस थाने को मामला भेजा जा रहा है, वहां के थाना प्रभारी का संपर्क विवरण भी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे.
पांचवां निर्देश : महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े सभी मामलों में जीरो एफआइआर दर्ज होने और उसके हस्तांतरण की सूचना तत्काल संबंधित डिवीजन के उपायुक्त (डीसीपी) को देनी होगी.
