लोकसभा में उठा नदिया के बामनपुकुर किले का मुद्दा

लोकसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान सांसद जगन्नाथ सरकार ने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के बामनपुकुर में स्थित किले की खंडहर स्थिति पर सवाल उठाया.

केंद्रीय मंत्री बोले- स्मारक सुरक्षित, राज्य से कोई स्मारक लापता नहीं

संवाददाता, कोलकाता.

लोकसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान सांसद जगन्नाथ सरकार ने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के बामनपुकुर में स्थित किले की खंडहर स्थिति पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि क्या यह किला 1920 में राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया था और यदि हां, तो इसके लुप्त होने के कारण क्या हैं और इसके संरक्षण में क्या चुनौतियां हैं. सांसद ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) द्वारा स्मारक का पता लगाने और उसके जीर्णोद्धार के लिए उठाये गये कदमों का विवरण भी मांगा, जिसमें हाल ही में किये गये सर्वेक्षण या उत्खनन शामिल थे. उन्होंने सरकार से यह भी जानना चाहा कि क्या पश्चिम बंगाल या देश भर में ऐसे अन्य स्मारक हैं जो अब लापता या लुप्त हो गये हैं और उन्हें बचाने के लिए क्या उपाय किये जा रहे हैं.

इस सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि बामनपुकुर स्थित किला राष्ट्रीय महत्व का एक स्मारक है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के संरक्षण और नियंत्रण में है. केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल राज्य से किसी भी स्मारक के लापता या लुप्त होने की सूचना नहीं मिली है. हालांकि, एएसआइ द्वारा हाल ही में की गयी समीक्षा में देश भर में 18 ऐसे स्मारकों की पहचान की गयी है, जो अब राष्ट्रीय महत्व के नहीं रहे और जिन्हें अधिसूचना के तहत सूची से हटा दिया गया है. मंत्री ने आगे कहा कि एएसआइ ने संरक्षित स्मारकों और क्षेत्रों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कई उपाय किये हैं.

एएसआइ के अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में संरक्षित स्मारकों और क्षेत्रों का समय-समय पर दौरा करते हैं, ताकि उनकी संरक्षण स्थिति का आकलन किया जा सके और आवश्यक मरम्मत एवं रखरखाव का निर्धारण किया जा सके.

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