समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा करेगा इसरो का ‘ट्रांसपोंडर’

दक्षिण 24 परगना सहित राज्य के तटीय इलाकों में 15 अप्रैल से 14 जून तक गहरे समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है.

कोलकाता. दक्षिण 24 परगना सहित राज्य के तटीय इलाकों में 15 अप्रैल से 14 जून तक गहरे समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है. इस बीच, 15 जून से मछली पकड़ने का सीजन शुरू होने से पहले ही दक्षिण 24 परगना में तैयारियां जोरों पर हैं. मत्स्य पालन विभाग और जिला प्रशासन ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक खास पहल की है. अब, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की विकसित तकनीक सैटेलाइट बेस्ड मेरीटाइम सेफ्टी असिस्टेंट सिस्टम, जिसे आम तौर पर ट्रांसपोंडर कहा जाता है, का इस्तेमाल किया जायेगा. काकद्वीप उप-मंडल के ट्रॉलरों में इन उपकरणों को लगाने का काम शुरू हो गया है. गहरे समुद्र में कई बार जान जोखिम में डालते हैं मछुआरे : गहरे समुद्र में मछली पकड़ते समय मछुआरों को कई खतरों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि खराब मौसम, ट्रॉलर दुर्घटनाएं या गलती से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा पार कर जाना. इन जोखिमों को कम करने के लिए इसरो ने यह नयी तकनीक विकसित की है. खतरों को कम करने में मददगार है ट्रांसपोंडर : यह डिवाइस मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सीधे सैटेलाइट से जुड़ा होता है, जिससे मछुआरे समुद्र के किसी भी कोने से तटीय अधिकारियों तक संदेश भेज सकते हैं. ट्रॉलर दुर्घटनाग्रस्त होने, किसी मछुआरे की तबीयत बिगड़ने या आग लगने जैसी आपात स्थितियों में यह डिवाइस तुरंत एसओएस संदेश भेजने में सक्षम है. जहां मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता, वहां भी यह डिवाइस खतरे के संकेतों को तट तक पहुंचा सकता है. यह अत्याधुनिक डिवाइस ट्रॉलर को बांग्लादेशी जल सीमा में प्रवेश करने से पहले ही चेतावनी भेज देगा. मछली पकड़ने के दौरान यह डिवाइस मछुआरों को समुद्र में मछलियों के झुंड की जानकारी भी प्रदान करेगा, जिससे उन्हें विशेष लाभ मिलेगा. काकद्वीप में 300 ट्रॉलरों में लगाया जा रहा डिवाइस सूत्रों के अनुसार, काकद्वीप उप-मंडल क्षेत्र से ढाई हजार से ज्यादा ट्रॉलर बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने जाते हैं. पहले चरण में 300 ट्रॉलरों को इस अत्याधुनिक डिवाइस से लैस किया जा रहा है. मछुआरों के संगठनों का कहना है कि शेष ट्रॉलरों को भी चरणबद्ध तरीके से इन उपकरणों से सुसज्जित किया जायेगा. मत्स्य विभाग की योजना है कि भविष्य में दक्षिण 24 परगना जिले के सभी ट्रॉलरों में यह उपकरण लगाया जाए. मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों और मछुआरों के संगठनों ने इस पहल की सराहना की है. उनका मानना है कि यह तकनीक समुद्र में मछुआरों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी.

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Published by: Sandip tiwari

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