अवैध निर्माण कितना भी पुराना क्यों न हो, उसे गिराया जाना चाहिए : कोर्ट

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अवैध निर्माण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी अवैध इमारत को गिराने का उसकी उम्र से कोई लेना-देना नहीं है.

कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अवैध निर्माण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी अवैध इमारत को गिराने का उसकी उम्र से कोई लेना-देना नहीं है. अवैध निर्माण चाहे कितना भी पुराना क्यों ना हो, उसे गिराया जाना चाहिए. उच्च न्यायालय ने 1961 और 1970 के बीच बागुईहाटी में बने एक मकान को गिराने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत में दावा किया कि उक्त संपत्ति के भूतल पर निर्माण उसके ससुर ने 1961-1970 के बीच करवाया था, इसलिए इसे अनधिकृत नहीं माना जाना चाहिए. लेकिन उनके इस तर्क को अदालत ने मानने से इनकार कर दिया. न्यायाधीश ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने लगातार कहा है, बिना पूर्व अनुमति के किया गया निर्माण, चाहे वह कितने भी समय से अस्तित्व में हो, कानून की नजर में अनधिकृत ही रहता है. केवल समय बीतने से किसी अवैध कार्य को वैधता नहीं मिल जाती.

गौरतलब है कि विधाननगर नगर निगम आयुक्त ने 30 जनवरी, 2024 को बागुईहाटी स्थित 13, सुकांत पार्क स्थित इस परिसर को अवैध करार देते हुए गिराने का आदेश दिया था. वर्तमान मालिक के दिवंगत ससुर सचिंद्रलाल चौधरी ने आठ कट्ठा और तीन छटाक का एक भूखंड खरीदा था व 1961 से 1970 के बीच इस भूमि के पांच कट्ठे पर एक मकान बनाया गया. 1990 में पहली मंजिल पर दो अतिरिक्त कमरे बनाये गये.

भवन निर्माण पर पहली कानूनी लड़ाई 2009 में शुरू हुई, जब परिवार एक सदस्य ने कुछ मरम्मत कार्य शुरू किया और अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करायी गयी. विवाद चल ही रहा था कि विधाननगर नगर निगम और राजारहाट गोपालपुर नगरपालिका का विलय कर दिया गया और नवगठित विधाननगर नगर निगम अस्तित्व में आया. इसके बाद विधाननगर नगर निगम ने सभी पक्षों के साथ बैठक में पाया कि भवन का निर्माण अवैध तरीके से किया गया था. इसके बाद निगम ने बिल्डिंग को गिराने का आदेश दिया. इसके बाद संपत्ति के वर्तमान मालिकों ने निगम के फैसले के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन हाइकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया.

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Published by: Subodh kumar singh

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