डेटिंग ऐप के जाल में फंसे, तो हो जायेंगे बर्बाद!

विभिन्न डेटिंग ऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर शातिर युवतियां पहले लोगों से दोस्ती करती हैं, इसके बाद उन्हें मुलाकात के बहाने रेस्तरां में बुलाती थीं.

सावधान ! इश्क के चक्कर में आशिक को रेस्तरां ले जाती हैं सुंदरियां, भारी-भरकम बिल बनते ही हो जाती हैं फरार

संवाददाता, कोलकाता.

विभिन्न डेटिंग ऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर शातिर युवतियां पहले लोगों से दोस्ती करती हैं, इसके बाद उन्हें मुलाकात के बहाने रेस्तरां में बुलाती थीं. वहां खाने का ऑर्डर करने के बाद शातिर सुंदरियां वहां से फरार हो जाती थीं. इस गिरोह के जाल में फंसे व्यक्ति को महज कुछ आइटम के लिए बिल के तौर पर 10 हजार रुपये से भी अधिक चुकाना पड़ा था.

रुपये नहीं देने पर उसे जान से मारने की धमकी तक दी गयी थी. महानगर में सक्रिय एक ऐसे ही गिरोह का कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम थाने के अधिकारियों ने भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने मामले में एक ठग सुंदरी सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है, इनके नाम मरियम खातून और राणापति पासवास उर्फ अरुण बताये गये हैं. पुलिस ने मरियम को बारुईपुर और राणापति को एल्गिन रोड से पकड़ा है. अभियुक्तों के पास से तीन पीओएस मशीन, चेकबुक और अन्य सामान बरामद किये गये हैं.

क्या है मामला : पुलिस के अनुसार हुगली जिले के सिंगुर निवासी एक व्यक्ति ने कुछ दिनों पहले अपने साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज करायी थी. व्यक्ति ने अपनी शिकायत में बताया था कि एक डेटिंग ऐप पर उसकी दोस्ती एक युवती से हुई थी. युवती ने उसे मिलने के लिए एल्गिन रोड के रेस्तरां में बुलाया. रेस्तरां में दोनों की मुलाकात हुई. बातचीत के दौरान युवती ने कई ऑर्डर दिये और फिर वॉशरूम जाने के बहाने वह वहां से फरार हो गयी. बाद में रेस्तरां के लोगों ने उसके पास से 10 हजार से अधिक रुपये वसूल लिये. रुपये नहीं देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गयी. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि शहर के कुछ रेस्टोरेंट्स ने आपराधिक साजिश रची और उसके अनुसार कुछ लड़कियों को काम पर रखा गया, जिन्हें बेईमानी और धोखाधड़ी से डेटिंग प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल बनाना सिखाया गया. इसके बाद ये लड़कियां संभावित पीड़ितों को लुभाती थीं और इस तरह रेस्टोरेंट में मुलाकात का समय तय करती थीं.

डेट पर पहुंचने पर पीड़ितों को पहले से तय रेस्टोरेंट में ले जाया जाता था, जहां ऑर्डर देने के बाद बढ़े हुए बिल बनाये जाते थे और लड़कियां चली जाती थीं और पीड़ितों को 10 हजार तक के बिल का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता था.

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