मौजूदा स्वरूप में जारी रहा एसआइआर तो बड़ी संख्या में कट जायेंगे वैध वोटरों के नाम : ममता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीइसी) ज्ञानेश कुमार को फिर पत्र लिखकर राज्य में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया पर चिंता जाहिर की है.

संवाददाता, कोलकाता

मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीइसी) ज्ञानेश कुमार को फिर पत्र लिखकर राज्य में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया पर चिंता जाहिर की है.

मुख्यमंत्री ने तीन जनवरी को सीइसी को लिखे पत्र में कहा है कि जिस प्रकार से एसआइआर प्रक्रिया चल रही है, अगर यह मौजूदा स्वरूप में जारी रही तो इससे मतदाता सूची से काफी संख्या में वोटरों के नाम कट जायेंगे. पत्र में उन्होंने प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक कमियों का उल्लेख किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआइआर प्रक्रिया में खामियों की शिकायत करते हुए तीन बार पत्र लिखा जा चुका है. इससे पहले मुख्यमंत्री ने 20 नवंबर व दो दिसंबर को चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा था. सीएम ने मुख्य चुनाव आयुक्त से राज्य में एसआइआर को तुरंत रोकने की अपील की, और चेतावनी दी कि इससे बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कट सकते हैं. इससे भारत की लोकतांत्रिक नींव को ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि बेवजह जल्दबाजी और काफी जमीनी काम की कमी के कारण गंभीर कमियां हुई हैं, जिनमें खराब आइटी सिस्टम, अलग-अलग निर्देश और इस काम के लिए नियुक्त अधिकारियों की अपर्याप्त ट्रेनिंग शामिल है.

अगर इसे इसी तरह जारी रहने दिया गया, तो एसआइआर से ऐसा नुकसान होगा जिसकी भरपाई नहीं हो सकती, बड़ी संख्या में वोटरों को वोट देने से रोका जायेगा और लोकतांत्रिक बुनियाद पर हमला होगा.

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से तुरंत सुधार के उपाय करने की अपील की, ऐसा न होने पर, उन्होंने कहा कि मनमाने और बिना प्लान के इस काम को रोका जाना चाहिए. सुश्री बनर्जी ने सुनवाई के दौरान बूथ-लेवल एजेंट्स (बीएलए) को कथित तौर पर प्रवेश करने की अनुमति नहीं देने के मुद्दे को भी उठाया. उन्होंने कहा कि इससे एसआइआर की ‘निष्पक्षता, पारदर्शिता और भरोसे पर गंभीर सवाल’ उठते हैं. सुश्री ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग को उसकी देखरेख या निर्देश में किये गये किसी भी गैर-कानूनी, मनमाने या पक्षपाती काम के लिए पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न राज्य अलग-अलग मानदंडों का पालन कर रहे हैं, जिसके चलते समयसीमा में मनमाने ढंग से बदलाव किये जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्देशों को जारी करने के ‘बेहद अनौपचारिक’ तरीके पर चिंता जतायी. उन्होंने लिखा: महत्वपूर्ण निर्देश लगभग प्रतिदिन जारी किये जा रहे हैं, अक्सर व्हाट्सऐप संदेशों और टेक्स्ट संदेशों जैसे अनौपचारिक माध्यमों से. उन्होंने यह भी कहा कि इतने संवैधानिक महत्व के कार्य के लिए कोई उचित लिखित अधिसूचना, परिपत्र या वैधानिक आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं. सुश्री बनर्जी ने चेतावनी दी कि इस तरह की अनौपचारिकता से ‘सटीकता, पारदर्शिता या जवाबदेही की कोई गुंजाइश नहीं बचती’ और इससे गंभीर अनियमितताओं (जिनमें वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने की संभावना भी शामिल है) का खतरा है.

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