खास बातें
Himsagar Mango Export Crisis: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के विश्व प्रसिद्ध ‘हिमसागर’ आम के शौकीनों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बेहद निराश करने वाली खबर है. मौसम के अजीबोगरीब मिजाज और बेमौसम चक्रव्यूह ने हिमसागर आम के निर्यात (Export) पर संकट खड़ा कर दिया है. लगातार हुई मूसलाधार बारिश और उसके तुरंत बाद बढ़े अत्यधिक तापमान की वजह से पेड़ों पर लगे आमों पर काले धब्बे उभर आये हैं.
आधुनिक बैकिंग तकनीक भी हो गयी फेल
इस बार किसानों और बागवानी विभाग द्वारा आमों की सुरक्षा के लिए अपनायी गयी आधुनिक बैगिंग तकनीक (फलों को विशेष कवर से ढकना) भी मौसम की दोहरी मार के आगे पूरी तरह फेल साबित हुई. बैगिंग के अंदर ही अत्यधिक नमी और बाद में बढ़ी भीषण गर्मी के कारण फलों में फंगल इन्फेक्शन के शुरुआती लक्षण दिखने लगे हैं, जिसने निर्यातकों की रातों की नींद उड़ा दी है.
अमेरिका जाने वाला पहला कंसाइनमेंट रोकना पड़ा
मालदा के प्रमुख निर्यातक और ‘सृष्टि फूड प्रोडक्ट्स’ के सह-संस्थापक प्रसून चितलांगिया ने खुलासा किया कि इस सीजन में अमेरिका भेजी जाने वाली हिमसागर आम की पहली बड़ी खेप को ऐन वक्त पर रोकना पड़ा. विदेशी आयातक धब्बेदार या हल्के से भी संक्रमित फलों को कड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों के कारण स्वीकार नहीं करते.
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ऑर्डर भरपूर, पर माल नहीं
अंतरराष्ट्रीय बाजार से इस बार रिकॉर्ड ऑर्डर मिले. इसके बावजूद विदेशी मानकों पर खरे उतरने वाले दाग-रहित और उच्च गुणवत्ता वाले फल जुटाने में निर्यातकों को पसीना बहाना पड़ रहा है.
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क्या पूरा बिजनेस डूबा? मैंगो मर्चेंट्स ने बतायी हकीकत
इस बड़ी चुनौती के बीच मालदा मैंगो मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उज्ज्वल साहा का मानना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर या निराशाजनक नहीं है. आंतरिक सर्वे के अनुसार, मौसम और फंगल इन्फेक्शन का असर केवल 15 प्रतिशत बैग किये गये आमों पर ही देखा गया है. जिले के बागानों में अभी भी लाखों आम सुरक्षित और पूरी तरह स्वस्थ हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मालदा के हिमसागर की मांग अब भी बहुत मजबूत बनी हुई है.
Himsagar Mango Export Crisis: अब चुनिंदा बागानों पर टिकी उम्मीदें
इस साल मालदा से आम और लीची के रिकॉर्ड तोड़निर्यात की उम्मीद थी. इसके लिए राज्य बागवानी विभाग (State Horticulture Department) और निर्यातकों ने मिलकर किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों, वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई और कड़े निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन के लिए लगातार ट्रेनिंग और प्रोत्साहन दिया. इस अप्रत्याशित रोग के बाद अब रणनीति बदल गयी है.
निर्यातक अब उन चुनिंदा और सुरक्षित बागानों की पहचान करने में जुटे हैं, जहां मौसम का असर नहीं पड़ा है. वहां से उच्च गुणवत्ता वाले आमों की छंटनी (Sorting) कर विदेशी बाजारों में आपूर्ति की चेन को बनाये रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इस साल के कुल निर्यात लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा अब भी हासिल किया जा सके.
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