हल्दिया के प्रतिनिधि रंजन माइति की रिपोर्ट
बंगाल के आसमान में बादल छाने के साथ ही लोगों को हिल्सा का स्वाद याद आने लगता है. हिल्सा के लिए बारिश का मौसम बेहतर माना गया है. इस साल हिल्सा का सूखा खत्म होने की उम्मीद है. रविवार सुबह दीघा के मुहाने पर ट्रॉलर के घुसते ही सिल्वर फेस्टिवल मनाया गया. जुलाई के आखिर में हिल्सा का झुंड पलक झपकते ही गायब हो गया था. ट्रॉलर डूबने और तबाही के डर से मछुआरे समुद्र में नहीं गए.
व्यापारियों और खाने के शौकीनों में खुशी
मौसम बेहतर होते ही लॉन्च और ट्रॉलर समुद्र और नदी में आ गए. आज एक बार में करीब ढाई टन हिल्सा मुहाने पर उतारी गई. 300 से 900 ग्राम वजन वाली यह सिल्वर फसल थोक बाजार में 400 से 1200 टका प्रति किलो बिक रही है. 1 kg से ज़्यादा हिल्सा की कीमत 1300 से 2000 टका किलो के बीच है. हिल्सा का इतना बड़ा इंपोर्ट एक वरदान है. अब व्यापारियों और खाने के शौकीनों दोनों में खुशी है.
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वर्षों बाद बाजार में आयी इतनी मात्रा में हिल्सा
ट्रॉलर मालिक सुब्रत चंद्र कर ने कहा- मेरे दो ट्रॉलर मछली पकड़ने समुद्र में गए थे. उनमें से एक वापस नदी के मुहाने पर आ गया है. उसमें 2 से 2.5 टन हिल्सा है. वज़न के हिसाब से उन्हें 300 टका से लेकर लगभग 2000 टका तक में बेचा गया है. बहुत अच्छा लग रहा है. बहुत दिनों बाद जाल में मछली पकड़ी है. मार्केट में इतनी मात्रा में हिल्सा पहले कभी नहीं देखी गई. हालांकि जो पकड़ी गई, उसमें से कुछ बहुत महंगी थी.
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